बलिया।शांभवी धाम कसेसर में भागवत कथा के चौथे दिन गूंजे श्रीकृष्ण अवतरण के प्रसंग ।
शांभवी धाम कसेसर में भागवत कथा के चौथे दिन गूंजे श्रीकृष्ण अवतरण के प्रसंग ।
संजीव सिंह बलिया।शांभवी धाम कसेसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन वृंदावन से पधारे अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास मारुतिनंदनाचार्य वागीश जी महाराज ने अपने दिव्य प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन वैदिक धर्म में गृहस्थ आश्रम कभी निन्दनीय नहीं रहा, अपितु ऋषि - परम्परा ने ही गृहस्थ जीवन के माध्यम से सृष्टि परम्परा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने चारों आश्रमों — ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास — का क्रमशः और सम्यक पालन हर सनातनी का कर्तव्य बताया और उदाहरण स्वरूप कहा कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इन चारों आश्रमों से होकर ही वैकुंठ को प्रस्थान किया।रत्नगर्भा है माता वसुन्धरा, अवतरित होती हैं दिव्य आत्माएंवागीश जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि माता वसुन्धरा कभी बांझ नहीं रही हैं...
