Monday, February 16

बलिया।शिक्षक स्वयं के अनुभव और अनुभवात्मक ज्ञान को उपलब्ध संसाधनों से जोड़ सकेंगे: एकीकृत प्रशिक्षण के आठवें बैच का डाइट पर हुआ समापन

शिक्षक स्वयं के अनुभव और अनुभवात्मक ज्ञान को उपलब्ध संसाधनों से जोड़ सकेंगे: एकीकृत प्रशिक्षण के आठवें बैच का डाइट पर हुआ समापन

 संजीव सिंह बलिया।सामाजिक परिवर्तन और विकास एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षा की निर्णायक भूमिका होती है। शिक्षा न केवल व्यक्ति को प्रगति की दिशा देती है बल्कि समाज के सर्वांगीण उत्थान का आधार भी है। इसी उद्देश्य के तहत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) बलिया में एकीकृत प्रशिक्षण के आठवें बैच का सफल समापन किया गया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को अपने अनुभव और अनुभवात्मक ज्ञान को उपलब्ध संसाधनों से जोड़कर विद्यार्थियों के लिए शिक्षण को रोचक एवं आनंददायक बनाने पर विशेष जोर दिया गया।बच्चों के सीखने को बनाया जाए अनुभवात्मकराष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप, इस प्रशिक्षण में गतिविधि-आधारित शिक्षण, खोज और अन्वेषण पर आधारित शिक्षा की वकालत की गई। यह बताया गया कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की समझ और क्षमता उसकी रुचि, अनुभव, पूर्वज्ञान और प्रेरक तत्वों से निर्मित होती है।

इसलिए शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे पारंपरिक शिक्षण विधियों को नई तकनीकों, सूचना-संचार माध्यमों और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर बच्चों के लिए शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि एक आनंदमय अनुभव बनाएं।शामिल रहे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयआठवें बैच के इस प्रशिक्षण में लगभग 1500 शिक्षकों को गणित और भाषा शिक्षण, पर्यावरण अध्ययन, नैतिक शिक्षा, जीवन कौशल, अनुभवात्मक शिक्षण, आकलन, कला एवं संगीत, क्राफ्ट, समावेशी शिक्षा, नेतृत्व क्षमता का विकास, खेल एवं स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि महत्वपूर्ण विषयों से अवगत कराया गया।प्रशिक्षकों के प्रेरणादायी सत्रप्रशिक्षण प्रभारी रवि रंजन खरे ने विद्यालय में प्रतिदिन समय पर प्रार्थना सभा आयोजित कर उसे उत्सव के रूप में संपन्न करने पर बल दिया।डाइट प्रवक्ता जानू राम ने रोचक कहानियों और गतिविधियों से शिक्षकों को नए दृष्टिकोण से अवगत कराया।डॉ. अशफाक ने सीपीआर तकनीक सिखाकर इसे जीवन रक्षा हेतु अनिवार्य बताया।सड़क सुरक्षा संबंधी सुझाव राम प्रकाश ने दिए।मनोविज्ञान प्रवक्ता देवेंद्र सिंह ने बच्चों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने की विधियां समझाईं।प्रवक्ता राम यश योगी ने सामाजिक एवं पर्यावरणीय अध्ययन पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम प्रभारी डॉ. मृत्युंजय सिंह ने अनुशासन के मूल्यों पर बल देते हुए सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और संदेशप्रशिक्षण के अंतिम दिन शिक्षकों द्वारा प्रेरणा गीत, अभियान गीत और पढ़ने के महत्व पर आधारित एक लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। इसमें अनामिका ओझा, अभय कुमार पांडे, रश्मि दुबे, अमित सिंह सहित अनेक शिक्षकों ने शिक्षा की अलख जगाने का संदेश दिया।सम्मानित हुए सक्रिय शिक्षकप्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन और सक्रिय भागीदारी हेतु कई शिक्षकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इनमें प्रमुख नाम हैं:अनामिका ओझा (प्राथमिक विद्यालय रोहुआ बेलहरी)रश्मि दुबे (प्राथमिक विद्यालय नंदपुर बेलहरी)राजेश कुमार सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मेघा मठ)निशा मौर्य (कंपोजिट विद्यालय पिपरा)मोनिका शर्मा (कंपोजिट विद्यालय तिरुनाई खिदिरपुर सीयर)सुनीता यादव (प्राथमिक विद्यालय चकिया शेर)अरुण कुमार पाठक (कंपोजिट विद्यालय कटहीं बेलहरी)अमित कुमार सिंह (कंपोजिट विद्यालय मुराडीह बेलहरी)अभय कुमार पांडे (प्राथमिक विद्यालय तरवा पंदह)अर्चना कुमारी (प्राथमिक विद्यालय पहेसर)रानी चौहान (प्राथमिक विद्यालय खपतही)चंदा कुमारी चौरसिया (प्राथमिक विद्यालय सहूलाई पंदह)निधि सिंह (प्राथमिक विद्यालय सीहोरीडीह)अनामिका (प्राथमिक विद्यालय जहांगीरपुर)रंजू चौहान (प्राथमिक विद्यालय बभनौली लहसनी, नगरा)श्रीराम (प्राथमिक विद्यालय गढ़मलपुर)सहयोग और तकनीकी समर्थननगर क्षेत्र के पूर्व एआरपी डॉ. शशिभूषण मिश्र द्वारा कार्यक्रम में सहयोग प्रदान किया गया। साथ ही संतोष कुमार और चंदन मिश्र का तकनीकी सहयोग उल्लेखनीय रहा।इस प्रशिक्षण का समापन शिक्षकों के उत्साह, सक्रिय सहभागिता और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के संकल्प के साथ हुआ।

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