लखनऊ।ऊर्जा के उजास से आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ता प्रदेश

ऊर्जा के उजास से आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ता प्रदेश

लखनऊ।ऊर्जा किसी भी प्रदेश के विकास की वह आधारशिला है जिसके मजबूत होने पर उद्योगों को गति मिलती है खेतों को सिंचाई का संबल मिलता है घरों में रोशनी पहुंचती है और युवाओं के सपनों को उड़ान मिलती है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण प्रदेश के लिए विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करना अनिवार्य शर्त है। मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सुधारों और दूरगामी नीतिगत निर्णयों के माध्यम से विद्युत उत्पादन पारेषण वितरण उपभोक्ता सुविधाओं और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इन प्रयासों का मूल उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक निर्बाध गुणवत्तापूर्ण और सुलभ विद्युत पहुंचाना तथा ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र को केवल बिजली उत्पादन तक सीमित न रखते हुए इसे आर्थिक विकास और जनसुविधाओं के व्यापक अभियान के रूप में आगे बढ़ाया है। विद्युत उपकेंद्रों पर तैनात संविदा कार्मिकों और अधिकारियों को राजस्व वसूली के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। इसका उद्देश्य विद्युत उपकेंद्रों की राजस्व प्राप्ति बढ़ाने के साथ उपभोक्ता सेवाओं को बेहतर बनाना है। इसके परिणामस्वरूप राजस्व वसूली में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय वर्ष 2021-22 में लगभग 70,531.26 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली हुई थी, जो वर्ष 2022-23 में बढ़कर 83,564.35 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2023-24 में 1,03,600.48 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी 96,138.68 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली हुई। निश्चित तौर पर यह आंकड़े ऊर्जा क्षेत्र के वित्तीय प्रबंधन और राजस्व संग्रहण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को दर्शाते हैं।

विद्युत वितरण व्यवस्था में तकनीकी आधुनिकीकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। आरडीएसएस योजना के अंतर्गत 30 जून 2026 तक 92,90,143 उपभोक्ताओं के संयोजन पर स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। ब्लॉक स्तर तक सभी सरकारी संयोजनों पर स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। लगभग 3,78,690 मीटर वितरण परिवर्तकों तथा सभी 11 केवी पोषकों में 26,984 स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर व्यवस्था से उपभोक्ताओं को अपनी ऊर्जा खपत पर बेहतर नियंत्रण मिल रहा है। यूपीपीसीएल स्मार्ट ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपनी बिजली खपत की निगरानी करने के साथ रिचार्ज और भुगतान भी कर सकते हैं। मीटर रीडर की आवश्यकता कम होने तथा बिलिंग में मानवीय हस्तक्षेप घटने से त्रुटिरहित बिल उपलब्ध कराने में भी सहायता मिली है।

स्मार्ट मीटर को अधिक उपभोक्ता अनुकूल बनाने के लिए डिस्कनेक्शन और री-कनेक्शन पर लागू 50 रुपये का शुल्क समाप्त कर दिया गया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसी प्रकार प्री-पेड स्मार्ट मीटरों को पोस्ट-पेड मोड में परिवर्तित करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा और निर्धारित अवधि में भुगतान न होने पर सात दिन बाद संयोजन डिस्कनेक्शन के लिए अर्ह होगा। नए संयोजनों को भी पोस्ट-पेड मोड में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इससे विद्युत उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा और विकल्प प्राप्त हो रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बुंदेलखंड क्षेत्र के ग्रामीण निजी नलकूप विद्युत उपभोक्ताओं को एकल फसल की सिंचाई के लिए सीजनल टैरिफ का लाभ तथा अस्थायी विद्युत संयोजन की सुविधा प्रदान की गई है। यह पहल विशेष रूप से किसानों के लिए उपयोगी है, क्योंकि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में समय पर और किफायती विद्युत आपूर्ति उत्पादन क्षमता को सीधे प्रभावित करती है। इसी क्रम में लगातार बढ़ती विद्युत दरों के बीच प्रदेश के उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019-20 के बाद विद्युत दरों में वृद्धि नहीं की गई है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं तथा छोटे व्यवसायों को आर्थिक राहत मिली है।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने नई दिशा निर्धारित की है। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन एनर्जी टैरिफ को उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बनाया गया है। एचटी उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त ग्रीन एनर्जी टैरिफ को 0.36 रुपये प्रति यूनिट से घटाकर 0.34 रुपये प्रति यूनिट तथा एलटी उपभोक्ताओं के लिए 0.17 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित किया गया है। इससे हरित ऊर्जा के प्रति उपभोक्ताओं का रुझान बढ़ने की संभावना है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में प्रदेश को नई शक्ति मिलेगी।

इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों पर लागू वर्तमान टैरिफ को राज्य परिवहन के लिए भी अनुमन्य कर दिया गया है। इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा और सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने में सहायता प्राप्त होगी। इसी तरह रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के लिए विद्युत दरों को मेट्रो रेल सेवाओं की दरों को समान किया गया है। इससे सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के लिए किफायती और सुगम ऊर्जा व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं को राज्य सरकार द्वारा उद्योग का दर्जा दिया गया है तथा नीति के अनुरूप इन उद्योगों को औद्योगिक क्षेत्र में अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे उत्तर प्रदेश में तकनीकी निवेश को आकर्षित करने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा प्रदेश को प्रौद्योगिकी आधारित विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है।

उपभोक्ता सेवाओं में पारदर्शिता और त्वरित समाधान के लिए भी अनेक कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2025 तक 35 जोन और 75 मंडलों में सीजीआरएफ का गठन किया गया है, जिसके माध्यम से उपभोक्ताओं की शिकायतों का शीघ्र निस्तारण किया जा रहा है। 17 अक्टूबर 2025 से ऑनलाइन सीजीआरएफ पोर्टल शुरू किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है। विद्युत बिलों को सरल बनाते हुए हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। डिजिटल बिलिंग के लिए ई-मेल व्हाट्सऐप अथवा अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का विकल्प देकर भौतिक बिल वितरण पर निर्भरता घटाई जा रही है।

विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। वर्ष 2016-17 में 5,784 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2026-27 के जून 2026 तक 9,120 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन क्षमता प्राप्त की गई। पीएलएफ अर्थात प्लांट लोड फैक्टर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2016-17 में 68.42 प्रतिशत पीएलएफ के मुकाबले वर्ष 2025-26 में 80.68 प्रतिशत तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के जून 2026 तक 83.34 प्रतिशत पीएलएफ प्राप्त किया गया। विद्युत उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्ष 2016-17 में 33,556 मिलियन यूनिट ताप विद्युत उत्पादन के मुकाबले वर्ष 2025-26 के मार्च 2026 तक 62,896.143 मिलियन यूनिट तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के जून 2026 तक 16,699.608 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन प्राप्त हुआ।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने 25 मई 2025 को अधिकतम 192.1049 मिलियन यूनिट अर्थात 8004 मेगावाट का रिकॉर्ड विद्युत उत्पादन किया जो 94.61 प्रतिशत पीएलएफ के बराबर रहा। यह उपलब्धि प्रदेश की उत्पादन क्षमता और ऊर्जा संयंत्रों के बेहतर संचालन का प्रमाण है।

जल विद्युत के क्षेत्र में भी उपलब्धियों की एक नई इबारत लिखी गई है। वर्ष 2018 से 524.9 मेगावाट क्षमता के जल विद्युत गृहों के संचालन और रखरखाव के साथ नई जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। रिहंद जल विद्युत गृह पिपरी की क्षमता को 230 मेगावाट से बढ़ाकर 300 मेगावाट किया गया। सितंबर 2024 में रिहंद जल विद्युत गृह पिपरी तथा ओबरा जल विद्युत गृह द्वारा पिछले 25 वर्षों के विद्युत उत्पादन का रिकॉर्ड भी तोड़ा गया।

नई विद्युत परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को भविष्य के लिए सुरक्षित किया जा रहा है। 1×660 मेगावाट हरदुआगंज तापीय विस्तार परियोजना की इकाई का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 4 जनवरी 2022 को किया गया और फरवरी 2022 से इसका वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ हुआ। जवाहरपुर तापीय परियोजना की दोनों इकाइयों से क्रमशः फरवरी और दिसंबर 2024 से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हुआ। ओबरा सी तापीय परियोजना की दोनों इकाइयों से भी उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। पनकी तापीय परियोजना की द्वितीय इकाई से अप्रैल 2025 से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हुआ।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बुंदेलखंड ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर एक महत्वाकांक्षी पहल है। बुंदेलखंड क्षेत्र में 4,000 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क से उत्पादित ऊर्जा की निकासी के लिए 21 पारेषण उपकेंद्रों का निर्माण किया जा रहा है। कुल 21 उपकेंद्रों का निर्माण 28 पैकेजों में किया जा रहा है जिनमें से नौ का ऊर्जीकरण हो चुका है और शेष पर कार्य प्रगति पर है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान देने के साथ बुंदेलखंड के आर्थिक विकास को भी गति प्रदान कर सकती है।

विद्युत वितरण व्यवस्था को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए आरडीएसएस के अंतर्गत पूर्वांचल वाराणसी मध्यांचल लखनऊ और दक्षिणांचल आगरा वितरण निगमों में छूटे हुए आवासों के विद्युतीकरण हेतु 917.28 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना के अंतर्गत 19,503 मजरे और 2,51,487 घरों को लाभान्वित किया जाना है। इसी प्रकार, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय बहुल ग्रामों में विद्युतीकरण के लिए 31.86 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं जिससे 6,867 घरों एवं सार्वजनिक संस्थानों को विद्युत सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य है।

वास्तव में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र एक व्यापक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। एक ओर विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो रही है, तो दूसरी ओर पारेषण और वितरण तंत्र को आधुनिक बनाया जा रहा है। स्मार्ट मीटर, डिजिटल बिलिंग, ऑनलाइन शिकायत निस्तारण, ग्रीन एनर्जी इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग और सौर ऊर्जा जैसी पहलें ऊर्जा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आकार दे रही हैं। किसानों, गरीब परिवारों, छोटे व्यवसायियों जनजातीय समुदायों और दूरदराज के क्षेत्रों तक विद्युत सुविधाओं का विस्तार सामाजिक न्याय की भावना को भी साकार करता है।

ऊर्जा क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास बदलते उत्तर प्रदेश की उस विकास यात्रा का प्रतीक हैं जिसमें गांवों से लेकर महानगरों तक विकास की रोशनी पहुंचाने का संकल्प दिखाई देता है। उत्पादन से वितरण तक और परंपरागत ऊर्जा से हरित ऊर्जा तक उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भरता की नई राह पर अग्रसर है। ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत होती यह आधारशिला आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास रोजगार सृजन कृषि उन्नति और नागरिक सुविधाओं को नई गति प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ऊर्जा के उजास से विकसित आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को निरंतर मजबूती मिल रही है।

आदर अदीब पावेल बन्धु

जिला सूचना अधिकारी

लखनऊ

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