
जमाबंदी की बाधा से अटकी फार्मर आईडी, बड़ी संख्या में किसान परेशान।
राकेश कुमार यादव, सहरसा (बिहार)
बिहार सरकार द्वारा किसानों की भूमि से संबंधित फार्मर आईडी बनाने के उद्देश्य से पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में लगाए गए इन शिविरों में बड़ी संख्या में किसान फार्मर आईडी बनवाने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन जमाबंदी से जुड़ी तकनीकी अड़चनों के कारण अधिकांश किसानों को निराश लौटना पड़ रहा है।
शिविरों में सबसे बड़ी समस्या जमाबंदी को लेकर सामने आ रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के दिशा-निर्देश के अनुसार फिलहाल केवल उन्हीं किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा रही है, जिनके नाम पर स्वयं जमाबंदी दर्ज है। ऐसे किसानों की संख्या क्षेत्र में काफी कम है।
वहीं अधिकांश किसान ऐसे हैं, जिनकी कृषि भूमि अब भी उनके पिता या दादा के नाम से जमाबंदी में दर्ज है। इस कारण वास्तविक रूप से खेती करने के बावजूद इन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है। इस स्थिति को लेकर किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार को जमीनी हकीकत को समझते हुए नियमों में संशोधन करना चाहिए, ताकि वास्तविक कृषकों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
शिविर में मौजूद कर्मियों ने बताया कि जिन किसानों के नाम पर जमाबंदी दर्ज है, उन्हें फार्मर आईडी बनवाने के लिए आधार कार्ड, भूमि की अद्यतन रसीद एवं सक्रिय मोबाइल नंबर साथ लाना अनिवार्य है। सभी दस्तावेज सही पाए जाने पर तत्काल फार्मर आईडी बना दी जा रही है।
इस संबंध में सिमरी बख्तियारपुर अंचलाधिकारी शुभम वर्मा एवं राजस्व अधिकारी खुशबू कुमारी ने बताया कि फिलहाल केवल उन्हीं किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा रही है, जिनके नाम से जमाबंदी दर्ज है। जिन किसानों की जमीन उनके पिता या दादा के नाम पर है, उनकी आईडी अभी नहीं बन पा रही है। भविष्य में सरकार से कोई नया निर्देश प्राप्त होने पर उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जमाबंदी से जुड़ी इस तकनीकी समस्या के कारण बड़ी संख्या में किसान शिविरों से मायूस होकर लौटने को मजबूर हैं।
























