हजारों लोगों ने शिव को गुरु मानने का लिया संकल्प, 4500 ने किया नामांकन
राकेश कुमार यादव, सहरसा (बिहार)
सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर के प्रखंड क्षेत्र के बलवाहाट स्थित अपूर्व उच्च विद्यालय मैदान में रविवार को शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन की ओर से विशाल शिव गुरु परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिव शिष्य एवं श्रद्धालु शामिल हुए।
परिचर्चा को संबोधित करते हुए शिव शिष्य भाई परमेश्वर ने कहा कि भगवान शिव को गुरु रूप में स्वीकार करना आस्था का विषय है, न कि अंधविश्वास। उन्होंने कहा कि जो लोग शिव को गुरु मानकर शिष्य भाव अपनाते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलता है। यही कारण है कि आज हजारों लोग शिव को अपना गुरु मान रहे हैं।
उन्होंने बताया कि साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी ने जब से शिव को गुरु के रूप में स्वीकार किया, तब से उन्होंने समाज में शिव शिष्यता का संदेश फैलाना शुरू किया। यह शिष्यता जाति, धर्म, लिंग, खान-पान या वेशभूषा जैसे किसी भी भेदभाव से परे है। उन्होंने कहा कि शिव की शिष्यता पारंपरिक पूजा-पाठ से अलग एक आध्यात्मिक मार्ग है, जो व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान की ओर ले जाती है।
भाई परमेश्वर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 19 अप्रैल 1992 को एक पोस्टर पढ़कर उन्होंने शिव को गुरु माना था और आज वे पूरे देश में शिव गुरु के संदेश को पहुंचाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के रूप में शिव की कृपा ही वास्तविक दीक्षा है।
कार्यक्रम के दौरान भाई परमेश्वर के आध्यात्मिक अवतरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस परिचर्चा को सुनने के बाद करीब 4500 लोगों ने अपने नामों की घोषणा कर शिव को गुरु मानने और साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम से पूर्व साफ-सफाई अभियान चलाया गया। इसके साथ ही निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. रामविलास साह ने मरीजों का इलाज कर मुफ्त दवाइयों का वितरण किया।
मौके पर मधुबनी, दरभंगा, बेगूसराय, खगड़िया, सुपौल, मधेपुरा, समस्तीपुर और सहरसा सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे गुरु भाइयों एवं बहनों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि शिव को गुरु मानने वाले लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
























