प्रयागराज कोल्ड स्टोरेज हादसे में सलखुआ के तीन मजदूरों की मौत, शव आते ही मचा कोहराम
एक साथ निकली तीन शव यात्राएं, गांव में पसरा मातम; प्रशासन ने सहायता का दिया आश्वासन
राकेश कुमार यादव, सहरसा (बिहार)। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए कोल्ड स्टोरेज हादसे में जान गंवाने वाले सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड क्षेत्र के तीन मजदूरों का शव बुधवार को उनके पैतृक गांव लाया गया। शव पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों के बीच कोहराम मच गया। हर तरफ चीख-पुकार और मातम का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार मृतक मजदूर सलखुआ प्रखंड के बलियार और पिपरा गांव के रहने वाले थे। तीनों मजदूर ज्योतिष कुमार, मसिंदर सादा एवं सनोज चौधरी उर्फ बिलट चौधरी
का शव यूपी से एंबुलेंस के माध्यम से पूर्वी कोसी तटबंध के किनारे स्थित उनके गांव पहुंचा। एंबुलेंस आते ही परिजन शवों से लिपटकर रोने लगे, जिसे देखकर मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं। पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
एक साथ निकली तीन शव यात्राएं….
बुधवार को सलखुआ थाना पुलिस, अंचल व प्रखंड प्रशासन की मौजूदगी में तीनों मजदूरों की शव यात्रा गांव से निकाली गई। शव यात्रा कोसी नदी घाट तक पहुंची, जहां पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया। एक ही गांव से एक साथ तीन शव यात्राएं निकलने से पूरा इलाका गमगीन हो गया।
मौके पर तैनात रही पुलिस व प्रशासन……
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार, अंचलाधिकारी पुष्पांजलि कुमारी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज कुमार, सलखुआ थाना की एसआई स्वीटी कुमारी, दीपक राम पुलिस बल के साथ सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने पहुंचे।
इस दौरान सीपीआई नेता ओमप्रकाश नारायण, खगड़िया सांसद प्रतिनिधि रितेश रंजन, मुखिया अनिल कुमार उर्फ अनिल महंत और समाजसेवी मनोज यादव सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद रहे।
मुआवजे का दिया आश्वासन……
श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना के तहत मृतकों के आश्रितों को सरकारी सहायता दी जाएगी। साथ ही श्रम विभाग की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी प्राथमिकता के आधार पर दिलाने की बात कही गई।
वहीं सीपीआई नेता ओमप्रकाश नारायण ने केंद्र सरकार, यूपी सरकार और बिहार सरकार से मृतकों के आश्रितों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है। सांसद प्रतिनिधि रितेश रंजन और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवारों को विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
यह दर्दनाक घटना एक बार फिर कोसी क्षेत्र से रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले मजदूरों की मुश्किलों और जोखिम को उजागर करती है। हर साल बड़ी संख्या में यहां के मजदूर रोजी-रोटी के लिए आलू गोदाम और अन्य कामों में जुटने के लिए बाहर जाते हैं।
























