Sunday, February 15

पूर्वी चंपारण पहुंचा विश्व का सबसे बड़ा सहस्त्र शिवलिंगम, 17 जनवरी को होगी स्थापना

पूर्वी चंपारण पहुंचा विश्व का सबसे बड़ा सहस्त्र शिवलिंगम, 17 जनवरी को होगी स्थापना

बिहार। भगवान शिव की आराधना से जुड़ा एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण पूर्वी चंपारण के लिए आया है। तमिलनाडु से 47 दिनों की लंबी यात्रा तय कर विश्व का सबसे बड़ा ‘सहस्त्र शिवलिंगम’ बिहार के कैथवलिया पहुंच गया है, जिसकी स्थापना 17 जनवरी को वैदिक विधि-विधान से की जाएगी।

 तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव से चला विश्व का सबसे बड़ा ‘सहस्त्र शिवलिंगम’ 2,225 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर मंगलवार को बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया पहुंच गया। यह विशाल शिवलिंगम विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया जाएगा।

करीब 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन वजनी यह ‘सहस्त्र शिवलिंगम’ एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर से 10 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया गया है। इस पर भगवान शिव के 1008 सूक्ष्म शिवलिंग उकेरे गए हैं। इसे 21 नवंबर 2025 को 96 चक्कों वाले विशेष ट्रक पर महाबलीपुरम से रवाना किया गया था, जो 47वें दिन कैथवलिया पहुंचा।

महावीर मंदिर ट्रस्ट, पटना के अंतर्गत निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर के ट्रस्टी शायन कुणाल ने बताया कि 17 जनवरी 2026 को धर्माचार्यों द्वारा वैदिक अनुष्ठान के साथ इसे मंदिर परिसर में 18 फीट ऊंचे पेडेस्टल और 15 फीट की आधार संरचना पर स्थापित किया जाएगा। ‘सहस्त्र शिवलिंगम’ की प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि बाद में तय की जाएगी।

आचार्य शिवानंद ब्रह्मचारी उर्फ वाचस्पति मिश्र ने बताया कि सहस्त्र शिवलिंगम भगवान शिव के अनंत स्वरूप, ब्रह्मांड की विशालता और उनकी निराकार सत्ता का प्रतीक है। यह शिव के सहस्र नामों और गुणों का द्योतक है, जिसमें सृजन, शक्ति और परम सत्य समाहित है। उन्होंने कहा कि चंपारण की धरती पर इसका आगमन पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय है।

उल्लेखनीय है कि इस विराट रामायण मंदिर की परिकल्पना पूर्व आईपीएस अधिकारी और महावीर मंदिर, पटना सहित कई संस्थानों के संस्थापक स्वर्गीय आचार्य किशोर कुणाल ने की थी। उनके निधन के बाद उनके पुत्र शायन कुणाल ने निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाली और इसे निरंतर आगे बढ़ाया।

विराट रामायण मंदिर 1,080 फीट लंबा, 580 फीट चौड़ा और 270 फीट ऊंचा होगा। करीब 123 एकड़ में फैले इस भव्य परिसर में 22 मंदिर और 18 शिखरों का निर्माण किया जाएगा। मंदिर को वर्ष 2030 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *