सादगी और ईमानदारी की मिसाल कायम करने वाले देश के सबसे बुजुर्ग विधायक आलम बदी ने छोड़ी दुनिया
लगातार पांच बार जीता विधायकी का चुनाव बिना लाव लश्कर पैदल चलकर करते थे अपना प्रचार
मुजीब खान
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की विधानसभा में लगातार पांच बार से जनपद आजमगढ़ के निज़ामाबाद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले देश में सबसे उम्रदराज और अपनी सादगी और ईमानदारी से पहचान बनाने वाले विधायक आलम बदी साहब ने लंबी बीमारी के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया उनके निधन से उत्तर प्रदेश की राजनीति हल्कों में शोक की लहर दौड़ गई समाजवादी पार्टी के विधायक आलम बदी के निधन से जहां समाजवादी पार्टी के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि पेश की वही विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी एक्स एकाउंट पर उनके साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
जनपद आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से 90 वर्षीय आलम बदी ने आजमगढ़ के कुर्मी टोला स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। बीमार चल रहे विधायक का लंबे समय से लखनऊ के अस्पताल में इलाज भी चल रहा था। सबसे ईमानदार विधायकों में भी उनकी गिनती होती थी। समाजवादी पार्टी से आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से पांच बार विधायक रहे। वह सपा के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। गुरुवार शाम चार बजे शहर के हर्रा की चुंगी जामेतुरशाद स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया जाएगा।
अपनी ईमानदार छवि के चलते ही पूर्वांचल ही नहीं पूरे यूपी में उन्होंने खास पहचान बनाई थी। उनके निधन की खबर से सपा समेत अन्य दलों के नेताओं ने भी शोक जताया है। घर पर संवेदना प्रकट करने वालों का तांता लगा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने निधन पर शोक जताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आज़मगढ़ की निज़ामाबाद विधानसभा सीट से लोकप्रिय विधायक जनाब आलम बदी साहब का इंतकाल अत्यंत दुखद है। भगवान दिवंगत आत्मा को शांति दें और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो। स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि आलम बदी का निधन प्रदेश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है।
सस्ते टांडे के कपड़े का कुर्ता पायजामा मामूली चप्पल हाथ में 12 सौ का मोबाइल बन चुका था उनकी पहचान
20 रूपये मीटर के टांडे के कपड़े का कुर्ता पायजामा, मामूली चप्पल, कान में छोटी सी सुनने की मशीन, हाथ में महज 1200 रूपये का मोबाइल, छरहरा बदन घूमने को एक पुरानी क्वालिस गाड़ी लखनऊ विधानसभा जाने के लिए रोडवेज़ बस का इस्तेमाल करने वाले उत्तर प्रदेश के जनपद आजमगढ़ के निज़ामाबाद विधानसभा से लगातार 5 वार विधायक जिनकी दिनचर्या सुबह उठकर अपने कमरे की खुद साफ़ सफाई कमरे की झाड़ू लगाने चुनावी मौसम में उनके घर पर पार्टी का कोई झंडा या भोंपू नहीं हां, भारत का झंडा जरूर लगा होता चहल-पहल भी चुनावी नहीं दिखती आम तौर पर बदी साहब के घर आने वाले को छोटे से कप में बिना दूध की चाय मिलती है। घर में मेहमान के लिए नाश्ता बनाने और परोसने के लिए कोई नौकर भी नहीं होता उनके बेटे और पोते ही इस काम को करते थे सर्दी हो या गर्मी घर के टीन शेड के नीचे वो लोगों से रूबरू होते हैं। आमदनी इतनी की उनके घर की पुताई हुए भी ज़माना बीत गया
सादगी से भरा था आलम बदी आज़मी का जीवन
विधायक आलम बदी आजमी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ के बिन्दवल गांव में हुआ था। उन्होंने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। वह अपनी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के लिए जाने जाते थे। वर्ष 1996 में वह पहली बार निजामाबाद सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद वर्ष 2002, 2012, 2017, और 2022 में इसी सीट से विधायक बने। बीच में एक बार 2007 में बसपा की लहर में अंगद यादव से हार का सामना करना पड़ा था। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के मनोज यादव को 34,187 मतों से हराकर पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे थे।
पांच बार के विधायक न गाड़ी न बंगला सिर्फ टीन शेड वाला घर
एक बार विधायक बनते ही लोग लग्जरी गाड़ियों के काफिले और बंगले में रहने लगते हैं। लेकिन आलम बदी पांच बार विधायक रहने के बाद भी शहर के कुर्मीटोला मोहल्ले में एक साधारण पुराने टीनशेड के घर में रहते थे। वीआईपी गाड़ियों के बजाय अक्सर रोडवेज बसों और साइकिल/स्कूटर पर सफर करते थे। साठ सालों से सक्रिय राजनीति में होने के बावजूद उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। उनके चुनाव प्रचार में बहुत ही कम राशि खर्च होती थी। समाजवादी पार्टी की सरकार में उन्हें कई बार मंत्री पद की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि वह जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करना चाहते हैं। आलम बदी के परिवार में उनकी पत्नी कुदसिया खान, 6 बेटे और 1 बेटी के अलावा बहुएं, पौत्र और पौत्रियां हैं।
























