Sunday, February 15

भदोही।क्रांतिज्योति माता सावित्रीबाई फुले के जन्मोत्सव पर गरिमामय समारोह।

क्रांतिज्योति माता सावित्रीबाई फुले के जन्मोत्सव पर गरिमामय समारोह।

शरद बिंद 

ज्ञानपुर/भदोही। भारत की प्रथम महिला शिक्षिका एवं महान समाज सुधारक क्रांतिज्योति माता सावित्रीबाई फुले के जन्मोत्सव एवं क्रांति ज्योति सम्मान समारोह का आयोजन आज संत रविदास फाउंडेशन द्वारा सम्राट प्लान, कंसापुर में बड़े उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक प्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।

कार्यक्रम की शुरुआत माता सावित्रीबाई फुले के जीवन-दर्शन एवं उनके अथक संघर्ष को याद करते हुए हुई। मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ. शतरुद्र प्रकाश, असिस्टेंट प्रोफेसर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने विस्तार से बताया कि सावित्रीबाई फुले ने 19वीं शताब्दी में महिलाओं की शिक्षा के लिए जो साहसिक कदम उठाए, वे आज भी भारतीय समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा, “माता सावित्रीबाई का योगदान शिक्षा, समानता एवं सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अमर है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि अंधकार में भी शिक्षा की ज्योति से समाज को रोशन किया जा सकता है।”

विशिष्ट अतिथि माननीय हीरालाल मौर्य, पूर्व चेयरमैन ज्ञानपुर ने सामाजिक समरसता एवं शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। सिग्नेचर अथॉरिटी फूल कुमारी ने अपने संबोधन में संत रविदास फाउंडेशन के उद्देश्यों की पुष्टि करते हुए कहा कि संगठन सामाजिक उत्थान एवं शिक्षा प्रसार के कार्यों में निरंतर सक्रिय रहेगा।

डी.पी. चौधरी, डेवलपमेंट ऑफिसर, सिंगरौली (मध्य प्रदेश) ने जोर देकर कहा कि “शिक्षित समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव है।” मिथिलेश सामंत ने भी फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संत रविदास फाउंडेशन के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने की। इस दौरान महासचिव जे.पी. वर्मा, मीडिया प्रभारी अनुराग कुमार सहित संगठन के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। विशेष रूप से क्षेत्राधिकारी (सीओ) ज्ञानपुर द्वारा पुलिस अधीक्षक भदोही के प्रतिनिधि के रूप में गरिमामयी उपस्थिति रही।

समारोह में फूल कुमारी, खुशी, बिनय राव, रत्नेश, संजीव, अयांशी, आकांक्षा, सुरेंद्र सर, वन्दना सहित अनेक गणमान्य नागरिकों एवं कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम का समापन माता सावित्रीबाई फुले के विचारों को जीवन में उतारने, शिक्षा के प्रसार एवं सामाजिक न्याय के प्रति दृढ़ संकल्प के साथ हुआ। यह समारोह न केवल सावित्रीबाई फुले की स्मृति को जीवंत रखने का प्रयास था, बल्कि समाज में शिक्षा एवं समानता की ज्योति फैलाने का संदेश भी देता है।

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