
नए साल के पहले दिन एस एस पी आफिस गेट पर पुलिस से पीड़ित युवक ने किया आत्मदाह का प्रयास हालत गंभीर।
बदायूं / उत्तर प्रदेश के जनपद बदायूं से एक ऐसी खबर आज वर्ष के पहले दिन और पहली सुबह को समाने आई है जिसने सभी के रोंगटे खड़े कर दिए इस घटना से पुलिस की कार्यवाही के दावों की भी पोल खुलती दिखी है क्योंकि जहां प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश है कि पीड़ित की तहरीर पुलिस तत्काल कार्यवाही करे और पुलिस के आला अधिकारी भी इस पर सख्ती दिखाते नजर आते है लेकिन पुलिस है कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रही है जिसके परिणाम स्वरूप आज एक गरीब रिक्शा चालक ने अपनी फरियाद न सुने जाने से पीड़ित होकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग के हवाले कर दिया जब तक उक्त युवक को लोगो ने आग से बचाया तब युवक बुरी तरह झुलस गया था जिसे बरेली रेफर किया गया है जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है ।
स्वय को आग के हवाले करने वाला युवक शहर के नई सराय मोहल्ले का निवासी गुलफाम है जो रिक्शा चलाता था विगत 30 नवंबर को क्षेत्र के कुछ लोगो से उसका विवाद हो गया था जिसमें उसका ई रिक्शा और मोबाइल समेत कुछ रुपए आरोपियों ने छीन लिए थे। इस मामले में सदर कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी किंतु बार बार दौड़ने के बाद पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की पीड़ित युवक ने बताया कि जब इसकी शिकायत उसने कई बार पुलिस से करने के बाद पुलिस क्षेत्राधिकारी से की तो वहां भी न्याय नहीं मिला उल्टा सीओ ने उसे डोडा लगाकर जेल भेजने की धमकी दे डाली उसने आरोप लगाते हुए कहा कि रिक्शा छीन लिए जाने से उसकी रोजी रोटी बंद हो गई और पुलिस के चक्कर काटते काटते थक गया तो विवश होकर आज उसने अपने आपको खत्म करने का फैसला लिया और अपने आप को आग के हवाले कर दिया।
युवक की हालत गंभीर है। उसका इलाज किया जा रहा है।
पुलिस कर्मियों ने किसी तरह आग बुझाई। जबकि इसके बाद झुलसे हुए युवक को जिला अस्पताल लाया गया है।
सीओ सिटी संजीव कुमार और सीओ उझानी शक्ति सिंह उसको यहां लेकर आए हैं।
पुलिस अगर कर देती कार्यवाही तो नहीं होती घटना
उत्तर प्रदेश पुलिस को प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश है कि किसी भी पीड़ित के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और दिए गए प्रार्थना पत्र पर पीड़ित न्याय मिलाना चाहिए इसी को लेकर पुलिस के आला अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण करके देखा जाता है कि कही किसी पीड़ित के साथ अन्याय तो नहीं हो रहा है ऐसे में थाने के पुलिस के साथ सीओ जैसे अधिकारी का वह बयान जो पीड़ित ने बताया है कि सीओ ने भी उसे डोडा में जेल भेजने की धमकी दी है काफी शर्मनाक है क्योंकि थाने में सुनवाई न होने पर छोटे आदमी के लिए सीओ का ही सहारा होता जिससे वह न्याय पाने की आस में अपनी आपबीती सुनाता है लेकिन न्याय दिलाने के बजाय पुलिस के वकालत करते सीओ द्वारा ही पीड़ित को हड़काया जाए तो न्याय कैसे मिल पाएगा और जब न्याय नहीं मिल पाएगा तो गरीब आदमी के पास सिवाय अपनी जान देने के कोई कालम नहीं बचता।
























