शाहजहांपुर।सरकारी आदेश प्राइवेट स्कूलों के ठेंगे पर सत्र शुरू होने से पूर्व स्कूलों ने तय कर दी ड्रेस और किताबों की दुकानों

सरकारी आदेश प्राइवेट स्कूलों के ठेंगे पर सत्र शुरू होने से पूर्व स्कूलों ने तय कर दी ड्रेस और किताबों की दुकानों

प्रति कोर्स 60 से 70 प्रतिशत कमीशन बुक सेलर देते स्कूल स्वामी को इसी प्रकार ड्रेस जूते मोजे पर भी है कमीशन

हर वर्ष नई किताबों की बिक्री के लिए प्रकाशक द्वारा किया जाता है स्लेवस में बड़ा बदलाव

मुजीब खान

शाहजहांपुर । हर बार नवीन शैक्षिक सत्र शुरू होने से पूर्व शासन और प्रशासन द्वारा सख्त आदेश जारी किए जाते है कि कोई भी स्कूल अपने स्कूल से या किसी एक बुक सेलर से किताबें और किसी चिन्हित किसी एक दुकान से ड्रेस जूते मोजे इत्यादि समान लेने को अविभावक को बाध्य नहीं करेगा लेकिन यह आदेश सिर्फ कागजी ही दिखाई पड़ते है और प्राइवेट स्कूल खुलेआम सरकारी आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए खुलेआम चयन की हुई दुकान से किताबें कॉपियां , ड्रेस जूते मोजे इत्यादि सामान लेने का बाध्य करते देखे जाते है। लेकिन लाख शिकायतों के बावजूद भी शासन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं देता जिसके परिणाम स्वरूप प्राइवेट स्कूल स्वामी मनमानी किताबों की बिक्री करवाकर मोटा कमीशन खाकर अपनी जेबें भरकर अविभावकों की जेबों को खाली करने का काम करते दिखाई देते है ।

जबसे नवीन सत्र माह अप्रैल से शुरू होने लगा है तबसे प्राइवेट स्कूलों की चांदी कटने लगी है क्योंकि यह मार्च तक पुराना सत्र समाप्त करके नए सत्र की शुरुआत करते हुए प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों का चयन शुरू करके पहले तो अपने स्कूलों से ही बिक्री करते थे लेकिन शासन की सख्ती के चलते अब इन्होंने अपने कार्य में थोड़ा बदलाव लाते हुए चयन करी हुई एक दुकान पर एक ही प्रकाशक की किताबें रखवा कर दुकानदार से 60 से लेकर 70 प्रतिशत तक कमीशन तय करते है और फिर पहली अप्रैल को स्कूल के अध्यापकों को अधिक से अधिक पढ़ाई करने के लिए कहते है जिससे छात्र छात्राएं अपना काम छुटने के डर से अपने अविभावकों पर किताबें जल्द से जल्द खरीदने का दबाव डालते है और जल्दबाजी में अविभावक बताई हुई दुकान पर पहुंच कर किताबें ड्रेस जूते मोजे इत्यादि सामान खरीदने को विवश होता है जिससे दुकानदार मनमाने रेट लेकर खुलेआम अविभावकों का उत्पीड़न करता है लेकिन इस दौरान शासन और प्रशासन पूर्ण रूप से मूक दर्शक बना देखता रहता है।

एनसीआरटी की किताबों के साथ सपोर्टिग कोर्स के नाम पर लूट 

शासन का सख्त फरमान है कि सरकार द्वारा संचालित एनसीआरटी कोर्स हर विद्यालय में चलाया जाएगा जिसका पालन सभी सरकारी स्कूल तो करते ही है क्योंकि उन स्कूलों में सभी किताबें सरकार द्वारा मुफ्त प्रदान की जाती है लेकिन प्राइवेट स्कूल सरकार द्वारा मुफ्त दी जाने वाली किताबों को भी दुकान से खरीदवाते और साथ में प्राइवेट प्रकाशकों की महंगी किताबों को सपोर्टिंग कोर्स के रूप में लगवाते है इसके अलावा कोर्स के साथ क्रॉफ्ट का सामान कापियों किताबों पर चढ़ाए जाने कवर तक कोर्स के साथ लेना अनिवार्य किए जाते है।

प्राइवेट प्रकाशक लगाते है स्कूलों के चक्कर तय करते है मोटा कमीशन

जानकारी के अनुसार जैसे ही नवीन शैक्षिक सत्र का शुभारंभ होने को होता है उससे करीब एक पूर्व ही प्राइवेट प्रकाशक स्कूल स्वामियों से संपर्क करना शुरू कर देते है और स्कूल स्वामियों से मिल कर ही किताबों का रेट तय करते है और वहीं तय होता है कि कितना कमीशन दिया जाएगा जिसके परिणाम स्वरूप 10 रुपए लागत की किताब को 200 रुपए तक में बेचा जाता है। नाम न छापने के शर्त पर एक बुक सेलर ने बताया कि शाहजहांपुर में एक बड़े माफिया द्वारा सभी स्कूलों को कमांड किया जाता है और वही माफिया स्कूलों से दुकानों को तय करवाता है बुक सेलर ने बताया कि वह तो मात्र एक कमीशन एजेंट के रूप में कार्य करके मात्र 10 प्रतिशत ही कमाई कर पाता बाकी की बड़ी कमाई तो स्कूल की होती है जिसे प्रति कोर्स पर 70 प्रतिशत तक कमीशन स्कूल को दिया जाता है।

हर वर्ष बदला जाते है किताबों के स्लैबस में बड़ा बदलाव

पहले एक किताब से कई कई बच्चे पड़ लिया करते थे एक क्लास पास करने के बाद आगे जाने वाला बच्चा अपनी किताब को उसके द्वारा पास करी हुई कक्षा में आने वाले को दे दिया करता था जिसके कारण अधिकतर किताबें खरीदने का बोझ कम हो जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है अब चालाक प्रकाशकों द्वारा प्रति वर्ष किताबों में बड़ा बदलाव कर दिया जाता है जिसके कारण अगले वर्ष किताब रद्दी बन जाती है और बच्चों को नई किताबें खरीदनी पड़ती है ।

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