आयुर्वेदिक औषधि पौधों पर दो दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत
रांची। विनीत कुमार
जीवन आरोग्य महाविद्यालय, रांची के तत्वाधान में शनिवार से आयुर्वेदिक औषधि पौधों की कृषिकरण एवं प्रसंस्करण विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पहले दिन प्रशिक्षण संभाग में कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ आनंदमार्ग प्रचारक संघ के आचार्य गुणाकारानंद अवधूत एवं सुसारी कोनगाड़ी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के पश्चात विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को उपयोगी जानकारी दी। प्रशिक्षक अजय कल डुलना ने पौधों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए केंचुआ खाद बनाने की विधि विस्तारपूर्वक समझाई। उन्होंने बताया कि केंचुआ खाद एक जैविक खाद है, जिसके निर्माण में केचुआ, गोबर, घास-फूस, पत्ते, पानी, जुटबोरा, छलनी और पैकेट का उपयोग किया जाता है। यह खेती को उर्वरक बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। इसके बाद श्री कलडोलना ने मशरूम की खेती पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए बीज,पुआल, फॉर्मिलाइन लिक्विड, बाबीस्तीन, पॉलिथीन, पानी, ड्रम एवं बड़े प्लास्टिक की आवश्यकता होती है। साथ ही, उन्होंने बाजार तक उत्पाद पहुँचाने और बेहतर लाभ अर्जित करने के लिए मार्केटिंग संबंधी टिप्स भी साझा किए। द्वितीय पाली में महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. ज्ञान प्रकाश ने प्रतिभागियों को वृक्ष की जड़, तना और पत्तियों सहित विभिन्न आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की पहचान और उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने गिलोय, पत्थरचट्टा, एलोवेरा, अजवाइन, तुलसी, हल्दी और अपराजिता जैसे पौधों के औषधीय महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. प्रकाश ने यह भी बताया कि हमारे आस-पास उगने वाले अधिकांश पौधे आयुर्वेदिक औषधियों का स्रोत होते हैं। पूरे कार्यक्रम का संचालन भी डॉ. ज्ञान प्रकाश ने किया। पहले दिन कुल 25 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया और आयुर्वेदिक औषधि पौधों की कृषि एवं प्रसंस्करण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ हासिल कीं।
























