
प्रभात संगीत दिवस पर हुआ भक्ति और साधना का संगम
रांची ।
मधुमंजूषा आनन्द मार्ग ध्यान मंदिर, हेहल (रातु रोड) में रविवार को प्रभात संगीत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर छह घंटे का ‘बाबा नाम केवलं कीर्तन’ आयोजित हुआ, जिसके बाद सामूहिक साधना संपन्न हुई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य संपूर्णानंद अवधूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रभात संगीत नव प्रभात और आध्यात्मिक नवजागरण के गीत हैं, जो पूरे संगीत जगत को भक्ति रस से आप्लावित कर जनमानस को भावोत्तर जगत में प्रतिष्ठित करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रभात संगीत की शुरुआत पूज्य गुरुदेव ने 1982 में देवघर से की थी और 1990 तक इसकी संख्या बढ़कर 5018 तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि प्रभात संगीत भले ही बंगाल की बहुलता लिए हुए है, लेकिन इसमें हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अंगिका, अंग्रेजी सहित कई भाषाओं को स्थान मिला है। यह संगीत का एक नया घराना है जिसमें विश्व की सभी राग-रागिनियों को संरक्षित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान प्रभात संगीत गायन एवं नृत्य प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में दीदी सर्वज्ञा, लोकतिता, डॉ. करूणा शहदेव, भुक्ति प्रधान विजय कुमार, पंचू दादा , तात्विक रतन, शिवलाल समेत अनेक साधक उपस्थित रहे।
























