केस ट्रायल के 40 वें दिन कोर्ट ने मासूम को पटक पटक कर मारने वाले दरिंदे चाचा को सुनाई फांसी की सज़ा
भाभी से एक तरफा प्यार में पागल देवर ने गुस्से में दी थी डेढ़ साल के मासूम भतीजे को खौफनाक मौत
मुजीब खान
फिरोजाबाद : जनपद के शिकोहाबाद में विगत 30 मई को एक चाचा द्वारा अपने डेढ़ साल के मासूम भतीजे को 8 बार जमीन पर पटक पटक कर दर्दनाक मौत दी गई थी जिसमें जनपद न्यायाधीश ने उक्त मामले में तत्काल सुनवाई करने हेतु मामले को फास्ट ट्रैक में भेजा जहां सभी साक्ष्यों के आधार पर मासूम के हत्यारे को मात्र 40 दिन में फांसी की सजा सुना कर एक मिसाल पेश की है दरिंदे चाचा को कोर्ट द्वारा फांसी की सजा दिए जाने की बात सुनकर जहां मासूम की मां ने न्यायाधीश का धन्यवाद अदा करते हुए कहा कि उसे भरोसा था कि उसे और मासूम बच्चे को न्याय मिलेगा लेकिन इतनी जल्दी मिलेगा यह नहीं पता था वही लोगो ने न्यायाधीश की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि सभी कोर्ट इसी तरह तत्काल सुनवाई करने लगे तो अपराध करने से पूर्व अपराधी सौ बार सोचने पर विवश होगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद के शिकोहाबाद में निवासी रति की शादी करीब 3 साल पहले बदायूं के सियारण नगर निवासी सुनीत शर्मा से हुई थी, लेकिन पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा अपने पति से अनबन के चलते रति शर्मा अपनी मां के घर अपने डेढ़ साल के पुत्र आरव के साथ रह रही थी इसी बीच पति से अनबन का फायदा उठाकर सुनीत की बुआ का बेटा बदायूं के शेखूपुर निवासी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक लंबे समय से रति पर शादी का दबाव बना रहा था। परिवार वालों के मुताबिक, रति ने उसका प्रपोजल ठुकरा दिया था। अरांव इलाके के बामई गांव की रहने वाली पिंकी बेटी रति शर्मा और डेढ़ साल के नाती आरव के साथ यादव कॉलोनी में सहेली पुष्पलता पाठक से मिलने आई थीं। पुष्पलता हाल ही में एक सड़क हादसे में घायल हुई थीं। उसी दिन 30 मई की दोपहर तीन बजे विराज भी पुष्पलता के घर पहुंच गया। और मासूम आरव को टाफी दिलाने के बहाने गोद में लेकर निकल गया जहां उसने रास्ते में मासूम आरव को जमीन पर पटकना शुरू कर दिया मौके पर मौजूद सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर दिखाई दिया कि विराज ने आरव को 8 बार पूरी ताकत लगाकर जमीन पर पटका जब मोहल्ले वाले बाहर निकलकर आए तो विराज उसे कंधे पर लादकर लाया और घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया था जिसे पुलिस ने घटना के 24 घंटे के अंदर मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया मुठभेड़ में उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी।जिसे कल शुकवार को दोपहर बाद जनपद के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सज़ा सुनाई है।
सीसीटीवी फुटेज बने अहम सबूत इसी पर कोर्ट ने सुनाई सज़ा
मासूम आरव की हत्या के मामले में जनपद की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जिस आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई उसमें सबसे अहम सबूत सीसीटीवी फुटेज रहे जिसमे आरोपी युवक बच्चे की हत्या करते हुए दिख रहा है। इस विषय पर सरकारी वकील राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि कोर्ट ने 1 महीने 10 दिन में फैसला दिया है। पुलिस ने 6 दिन में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। बचाव की पक्ष की तरफ से दलील दी गई थी कि घटना के वक्त आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन, कोर्ट ने विराज को आरोपी माना है। कोर्ट में जब फुटेज दिखाया गया तो आरोपी खुद अपने आप को थप्पड़ मारने लगा था। वह घटना से काफी दुखी प्रतीत हो रहा था। वकील ने कहा कि देश स्तर पर फैसले का संदेश जाएगा। साथ ही लोगों में भी विश्वास पैदा होगा।
मां बोली थी मेरे बच्चे की गर्दन लटक रही थी फांसी की सज़ा मिले दरिंदे को
रति ने बताया था कि ससुराल वाले मेरे साथ मारपीट करते थे। मेरी तबीयत भी खराब रहती थी। इस कारण मेरी मां मुझे अपने साथ ले आईं थी। कुछ समय बाद मेरी पति की बुआ का बेटा विराज मुझे फोन करने लगा। एक दिन उसने कहा, वह मुझसे मिलने आ रहा। उसने मुझसे शादी करने की बात कही, लेकिन मैंने मना कर दिया। मैंने कहा कि मैं शादीशुदा हूं। मेरा एक बच्चा भी है। वह मेरी मौसी के यहां पहुंच गया। मेरे बच्चे को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। मुझे लगा कि रिश्तेदार है। इसलिए बिना शक के ले जाने दिया। उसने मेरे बच्चे को पटक-पटकर कर मार डाला। मेरे बच्चे की गर्दन पूरी तरह लटक रही थी। मृतक आरव की मां रति शर्मा ने फैसले से पहले कहा था कि, “जिस तरह आरोपी ने मेरे बेटे को सड़क पर पटक-पटककर मार डाला, उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए। मेरा बेटा कोई गुंडा नहीं था। मुझे न्याय चाहिए। दोषी को ऐसी सजा मिले जो समाज के लिए एक नजीर बने।”
कोर्ट ने कहा रेयर ऑफ रेयरेस्ट क्राइम
मात्र 40 दोनों में एक दरिंदे हत्यारे को फांसी की सज़ा देकर इतिहास रचने वाले जिला जज डाक्टर बब्बू सारंग ने फैसला सुनाते समय टिप्पड़ी करते हुए कहा कि यह रेयर ऑफ रेयरेस्ट क्राइम है। आरोपी ने एक मासूम की हत्या नहीं की, बल्कि उसके माता-पिता का जीवन बर्बाद कर दिया। ऐसे अपराधी को अगर मृत्युदंड से कम सजा दी तो यह न्याय के विपरीत होगा। इस लिए इसको मृत्यु दंड ही दिया जाना न्याय हित में होगा जिला जज ने फैसले में कहा कि आरोपी की को फांसी की सज़ा दिए जाने पर उसको तब तक लटकाया जाए जब तक उसकी मौत न हो जाए ।
























