बलिया।भाजपा नेता से मारपीट मामले में थानाध्यक्ष समेत 8 पुलिसकर्मी तलब, अदालत ने मुकदमा चलाने का दिया आदेश

भाजपा नेता से मारपीट मामले में थानाध्यक्ष समेत 8 पुलिसकर्मी तलब, अदालत ने मुकदमा चलाने का दिया आदेश

 बलिया ।भाजपा नेता  देवनारायण प्रजापति के साथ कथित मारपीट और पुलिस हिरासत में उत्पीड़न के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मियों को विभिन्न आपराधिक धाराओं में मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया है। न्यायालय के इस फैसले से पुलिस महकमे में हलचल मच गई है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शैलेश पांडेय ने अपने आदेश में तत्कालीन थानाध्यक्ष अतुल कुमार मिश्रा, उपनिरीक्षक छुन्ना सिंह, मुन्ना लाल यादव तथा कांस्टेबल शिवम पटेल, विवेक कुमार, संतोष सिंह, राजकुमार पटेल और दीनानाथ राम को विभिन्न धाराओं में विचारण हेतु समन जारी कर 25 जून 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

मामला 13 अगस्त 2023 का बताया जा रहा है। परिवादी देवनारायण प्रजापति के अनुसार भूमि विवाद के एक प्रकरण में पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और जबरन थाने चलने का दबाव बनाने लगे। उन्होंने स्वयं थाने आने की बात कही और रात करीब 11 बजे थाने पहुंचे। आरोप है कि थानाध्यक्ष के कक्ष में प्रवेश करते ही उन्हें अपशब्द कहे गए और नेतागिरी खत्म करने की धमकी दी गई। इसके बाद कई पुलिसकर्मियों ने मिलकर उन्हें जमीन पर गिराकर लात-घूंसों, जूतों और बेल्ट से पीटा।

परिवादी का आरोप है कि मारपीट के दौरान उनकी आंख में गंभीर चोट आई, जिससे खून बहने लगा। घायल अवस्था में उन्हें थाने में ही रखा गया और बाद में चिकित्सीय परीक्षण के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। इसके बाद उन्हें धारा 151 के तहत निरुद्ध कर एसडीएम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जमानत पर रिहाई हुई।

रिहा होने के बाद उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर पुनः चिकित्सीय परीक्षण और उपचार की मांग की। बाद में विभिन्न चिकित्सकों द्वारा जांच के दौरान शरीर पर कई चोटों की पुष्टि होने का दावा किया गया। आंख की गंभीर चोट के कारण उन्हें जिला अस्पताल, वाराणसी और बाद में एसजीपीजीआई लखनऊ रेफर किया गया। परिवादी का कहना है कि लंबे उपचार के बावजूद उनकी आंख की रोशनी वापस नहीं आ सकी है।

देवनारायण प्रजापति का आरोप है कि मामले में प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित करने का प्रयास किया जाता रहा, जिससे आरोपी पक्ष लंबे समय तक अदालत में उपस्थित होने से बचता रहा। हालांकि अब न्यायालय द्वारा विभिन्न धाराओं में संज्ञान लेते हुए सभी आरोपित पुलिसकर्मियों की तलबी का आदेश जारी कर दिया गया है।

न्यायालय के इस आदेश को पुलिस हिरासत में कथित उत्पीड़न से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है। अब 25 जून 2026 को सभी आरोपितों की अदालत में पेशी प्रस्तावित है।

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