सहरसा (बिहार)।शिव शिष्यता पर जोर, अनुशासन व सौहार्द को बताया आवश्यक

शिव शिष्यता पर जोर, अनुशासन व सौहार्द को बताया आवश्यक

राकेश कुमार यादव, सहरसा (बिहार) 

सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड अंतर्गत कोपरिया पंचायत स्थित मुरली यादव के आवास पर रविवार को शिव शिष्य हरिंद्रानंद फाउंडेशन की ओर से बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिव शिष्यता, गुरु-शिष्य परंपरा और समाज में अनुशासन की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई।

वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छंदता नहीं होता। स्वच्छंदता की स्थिति व्यक्ति, समाज और देश के लिए घातक साबित हो सकती है। शिव शिष्यों को मर्यादा और अनुशासन का पालन करते हुए समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

शिव शिष्य भाई परमेश्वर ने संबोधित करते हुए कहा कि जगत गुरु शिव की कृपा से शिष्यों में जो प्रभाव दिखता है, वह समाज को आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कुछ क्षेत्रों में शिव शिष्यों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है, जहां बाहरी शिष्यों का प्रवेश अनुचित माना जाता है, जो सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा में गुरु के देहावसान से पूर्व उत्तराधिकारी तय करने की परिपाटी रही है, ताकि परंपरा सुचारू रूप से चलती रहे। लेकिन वर्तमान में कुछ लोग स्वयं को गुरु या अगुवा घोषित कर रहे हैं, जो परंपरा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिव गुरु ही सर्वोच्च मार्गदर्शक हैं और अन्य सभी शिव शिष्य आपस में गुरु भाई-बहन हैं।

उन्होंने आपसी सौहार्द, मधुरता और अनुशासन को जीवन में अपनाने पर बल देते हुए कहा कि विनम्र व्यक्ति ही समाज में विजयी होता है। उदाहरण देते हुए कहा कि कठोर दांतों के बीच कोमल जीभ सुरक्षित रहती है, जबकि दांत टूट जाते हैं।

बैठक में यह भी कहा गया कि भगवान शिव की शिष्यता ने वर्तमान समय में लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है, जिसे और बेहतर बनाने की जरूरत है। वक्ताओं ने कहा कि देश के हर गांव, टोला और मोहल्ले में भगवान शिव को गुरु के रूप में माना जाता है और इससे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

मौके पर मधेपुरा से आए राजकुमार, नरेश, प्रणव, राजेश, निराला, ब्रजेश, शशि, गुलशन, भीम, बिमल, चुना समेत बहन किरण और आरती सहित अन्य उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि शिव शिष्यता के विस्तार के लिए साहब श्री द्वारा निर्देशित कार्यों को गति देना जरूरी है, ताकि एक बेहतर समाज की परिकल्पना साकार हो सके।

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