खेत में खूंटा गाड़ने के लिए की गई खुदाई में मिली प्राचीन गणेश प्रतिमा, देखने उमड़ी भीड़
मटेश्वर धाम शिवगंगा पोखर से 100 मीटर दूर किसान के खेत से दो फीट नीचे मिली मूर्ति
विशेषज्ञों ने बताया 8वीं से 10वीं शताब्दी की दुर्लभ ब्लैक स्टोन प्रतिमा
राकेश कुमार यादव, सहरसा (बिहार)
सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर के अनुमंडल क्षेत्र के बलवाहाट कांठो पंचायत स्थित प्रसिद्ध बाबा मटेश्वर धाम मंदिर परिसर के पास एक खेत में खुदाई के दौरान प्राचीन गणेश प्रतिमा मिलने से इलाके में उत्सुकता का माहौल बन गया। मंदिर परिसर स्थित शिवगंगा पोखर से करीब 100 मीटर पूरब किसान सीताराम यादव के खेत में नेनूआ की लत्ती में अलान देने के लिए खूंटा गाड़ने के उद्देश्य से की गई खुदाई में जमीन से लगभग दो फीट नीचे यह दुर्लभ प्रतिमा मिली।
प्रतिमा मिलने की खबर फैलते ही मंदिर न्यास समिति के सदस्यों समेत आसपास के ग्रामीणों की भीड़ मौके पर उमड़ पड़ी। बाद में डाक कांवरिया संघ के मुन्ना भगत, कृष्ण कष्णैया व अन्य श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को साफ-सफाई कर मंदिर परिसर में स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
मामले की जानकारी हेरिटेज सोसाइटी के महानिदेशक डॉ. अनंताशुतोष द्विवेदी को तस्वीर भेजकर दी गई। मुन्ना भगत ने बताया कि डॉ. द्विवेदी के अनुसार यह गणेश प्रतिमा 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच की हो सकती है। वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, कोलकाता के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फणीकांत मिश्रा ने भी तस्वीर देखकर इसे लगभग 8वीं शताब्दी की दुर्लभ ब्लैक स्टोन से निर्मित प्रतिमा बताया है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिमा में भगवान गणेश के चार हाथ स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। इसमें कमल का चिन्ह, मूसक वाहन, कुल्हाड़ी (परशु), माला, सांप, मुकुट और आभूषणों की बारीक नक्काशी उकेरी गई है। साथ ही आधार भाग में चूहे की आकृति और पार्श्व में भक्तों की आकृति भी अंकित है, जो इसे अत्यंत दुर्लभ और कलात्मक बनाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी मटेश्वर धाम मंदिर परिसर और आसपास की खुदाई में कई प्राचीन मूर्तियां मिल चुकी हैं। करीब चार वर्ष पूर्व यहां सूर्य देव की दो प्रतिमाएं मिली थीं, जिन्हें मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।
बताया जाता है कि कांठो पंचायत स्थित बाबा मटेश्वर धाम मंदिर अति प्राचीन मंदिरों में शामिल है। यहां स्थापित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह पाताल लोक से जुड़ा हुआ है। शिवलिंग के चारों ओर एक से दो इंच का खाली स्थान है, जिसमें साल भर जल भरा रहता है। आश्चर्य की बात यह है कि सावन-भादो के महीनों में जल स्तर नीचे चला जाता है, जबकि चैत-वैसाख की भीषण गर्मी में पानी ऊपर आ जाता है।
मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर लगने वाले मेले को राज्य सरकार ने राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया है। सावन माह में बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल स्थित मुंगेर घाट से जल भरकर करीब 85 किलोमीटर पैदल चलकर लाखों कांवरिया और डाक बम यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। इसी कारण अब लोग इस स्थल को “मिनी बाबा धाम” के नाम से भी पुकारने लगे हैं।
























