मत्स्य पालन और जलीय कृषि में कौशल विकास पर सरकार का जोर, 22 हजार से अधिक लोगों को मिला प्रशिक्षण
नई दिल्ली। देश में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को आधुनिक, आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में मत्स्य पालन विभाग द्वारा सुनियोजित कौशल विकास और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के तहत पिछले छह महीनों में देशभर में 499 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनसे 22,921 मछुआरों, मछली पालकों और उद्यमियों को लाभ मिला है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत चलाए जा रहे इन कार्यक्रमों का उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना, उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, आधुनिक तकनीकों को अपनाना और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि करना है। यह योजना विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस के अवसर पर आईसीएआर–केंद्रीय मीठा जल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर में वर्ष 2025 से 2027 के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम कैलेंडर जारी किया। इस कैलेंडर में देशभर में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण सत्रों, अनुभवात्मक भ्रमण और ज्ञान साझा करने की गतिविधियों की स्पष्ट कार्ययोजना शामिल है।
इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से मछुआरों और मछली पालकों को वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल पद्धतियों को अपनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण में मछली बीज उत्पादन, उन्नत पालन तकनीकें, मिश्रित और एकीकृत मछली पालन, मछली स्वास्थ्य प्रबंधन, चारा निर्माण, समुद्री शैवाल की खेती और मूल्यवर्धित मछली प्रसंस्करण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
इसके साथ ही आधुनिक तकनीकों जैसे बायोफ्लॉक, पुनर्संचारी मत्स्य पालन प्रणाली (आरएएस), पिंजरा संस्कृति, सजावटी मछली प्रजनन और सजावटी मत्स्य पालन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन तकनीकों से मछली पालकों को कम क्षेत्र और कम पानी में अधिक उत्पादन का अवसर मिल रहा है।
महिलाओं के लिए मछली आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों, मत्स्य विपणन, स्वरोजगार और आजीविका केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित अनुभवात्मक भ्रमणों के माध्यम से किसानों को उन्नत मत्स्य पालन इकाइयों को प्रत्यक्ष देखने और सीखने का मौका दिया जा रहा है।
मत्स्य पालन विभाग ने इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, हैदराबाद के माध्यम से 2.93 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। प्रशिक्षण से जुड़े सभी खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक मछुआरें और किसान लाभ उठा सकें।
प्रशिक्षण राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मत्स्य विभागों, आईसीएआर के मत्स्य अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, भारतीय कृषि कौशल परिषद, केंद्रीय मत्स्य नौकायन एवं इंजीनियरिंग प्रशिक्षण संस्थान और राष्ट्रीय मत्स्य प्रसंस्करण एवं हार्वेस्टिंग प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से न केवल मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र मजबूत होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही देश में पोषण सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। मत्स्य पालन विभाग की यह पहल आने वाले वर्षों में भारत को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
























