
केराकत के मई गांव में एडीजी के आदेश पर तीन पर मुकदमा दर्ज, आरोपियों ने लगाया पेशे का दुरुपयोग कर फंसाने का आरोप
जौनपुर ।केराकत थाना क्षेत्र के मई गांव में दो पक्षों के बीच हुए विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। एक ओर जहां छेड़छाड़ व गाली-गलौज के आरोप में गांव निवासी मनोज सिंह पर मुकदमा दर्ज किया गया है, वहीं दूसरी ओर मनोज की पत्नी और पेशे से अधिवक्ता शशि सिंह ने पलटवार करते हुए एडीजी स्तर से हस्तक्षेप कर तीन लोगों पर गंभीर धाराओं मेंफ मुकदमा दर्ज करा दिया है।
छेड़छाड़ और मारपीट का आरो
मामले की शुरुआत 6 जुलाई 2025 को हुई जब गांव के निवासी राजेन्द्र सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी दो भतीजियां खेत से सब्जी तोड़कर लौट रही थीं, तभी मनोज सिंह ने उनके साथ बदतमीजी और अश्लील इशारे किए। जब यह बात राजेन्द्र सिंह को पता चली तो उन्होंने मनोज सिंह को समझाने की कोशिश की, लेकिन मनोज शराब के नशे में आरी लेकर उनके घर पर चढ़ आया और पूरे परिवार को गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी दी।
इस मामले में राजेन्द्र सिंह ने 9 जुलाई को केराकत थाने में तहरीर दी, जिस पर पुलिस ने BNS की धाराओं 352 (मारपीट की कोशिश), 351(2) (आक्रामक इरादा), और 296 (शांति भंग करना) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया। जांच की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक आशुतोष गुप्ता को सौंपी गई है।
वकील पत्नी ने दर्ज कराया पलटवार मुकदमा
दूसरी ओर, आरोपी मनोज सिंह की पत्नी शशि सिंह, जो वाराणसी में अधिवक्ता हैं, ने आरोप लगाया कि 6 जुलाई को शाम 4 बजे उनके पति पर संजय सिंह, संदीप सिंह और विवेक सिंह ने लाठी-डंडों से हमला किया, जिससे मनोज को गंभीर चोटें आईं, दांत टूट गया और ₹3000 नकद व मोबाइल भी छीन लिया गया। हालांकि स्थानीय थाने पर उनकी एफआईआर दर्ज नहीं हुई, लेकिन उन्होंने अपने पेशेवर प्रभाव का उपयोग करते हुए एडीजी स्तर से हस्तक्षेप कराया और 22 जुलाई को एफआईआर संख्या 0200 दर्ज हुई। इसमें BNS की धाराएं 309(6) (गंभीर चोट), 118(2) (साजिश), और 110 (डकैती) लगाई गईं।
गांव में चर्चा तेज है कि अधिवक्ता शशि सिंह ने अपने वकालती पेशे का अनुचित लाभ उठाकर एकतरफा कार्यवाही करवाई है, जबकि असली दोषी खुद उनके पति मनोज सिंह हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मनोज सिंह पहले से ही शराबखोरी और हिंसक व्यवहार के लिए कुख्यात हैं। वहीं जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें संजय सिंह और संदीप सिंह और विवेक सिंह सरकारी कर्मचारी व शिक्षक हैं, जिन्हें जानबूझकर फंसाने की साजिश रची गई है।
केराकत पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
























