
आनंद मार्ग जागृति, हेसल में त्रिदिवसीय सेमिनार प्रारंभ
राँची। आनंद मार्ग जागृति, हेसल में आयोजित त्रिदिवसीय ग्रीष्मकालीन सेमिनार का शुभारंभ शुक्रवार को प्रभात संगीत, कीर्तन एवं सामूहिक साधना के साथ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य प्रशिक्षक आचार्य देवप्रकाशानंद अवधूत ने गुरुदेव की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर भुक्ति प्रधान विजय कुमार, दादा हरिकृपानंद, दादा लीलामयानंद, दीदी सर्वज्ञा एवं दीदी चयनिका सहित कई वरिष्ठ मार्गदर्शक उपस्थित रहे।
मुख्य प्रशिक्षक ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि – गुरुदेव द्वारा प्रदत्त सामाजिक, आध्यात्मिक एवं अर्थनैतिक दर्शन को समझने व प्रचारित करने के उद्देश्य से इस प्रकार के सेमिनार आवश्यक हैं। सेमिनार की परंपरा गुरुदेव ने वर्ष 1969 में प्रारंभ की थी। आज के सत्र में “मानव शरीर एक जैविक यंत्र है” विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि “मन और आत्मा से युक्त मानव शरीर एक जटिल जैविक यंत्र है, जो 50 वृत्तियों द्वारा संचालित होता है। ये वृत्तियाँ विभिन्न चक्रों से नियंत्रित होती हैं। मन शरीर को नियंत्रित करता है, जबकि आत्मा मन की साक्षी बनती है। जीवन में संतुलन और आत्मोन्नति हेतु नियमित साधना और योगाभ्यास अनिवार्य हैं।” सेमिनार में राँची, पलामू, गया, रामगढ़, हजारीबाग सहित अनेक स्थानों से श्रद्धालु उपस्थित हुए। यह जानकारी आचार्य गानाधीषानंद अवधूत ने दी।
























