Monday, February 16

बरेली।चित्रकला शोधार्थी सिनिष्ठा ने चित्रकार कमर के जीवन को नवीन कलाकारों के लिए वरदान बताया ।

चित्रकला शोधार्थी सिनिष्ठा ने चित्रकार कमर के जीवन को नवीन कलाकारों के लिए वरदान बताया ।

सिनिष्ठा श्रीवास्तव रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली से चित्रकला से शोधार्थी है ।

बरेली / कलाकार ही कलाकार के हृदय की बात को भलीभांति समझ सकता है अब चाहे किसी क्षेत्र की कला से जुड़ा हो और खासकर यदि वह कलाकार नया कलाकार हो और उसी विषय पर शोध कर रहा हो तो उसकी बात ही अलग है। और यही कुछ बात है रुहेलखंड विश्विद्यालय से चित्रकला विषय पर शोध कर रही छात्रा सिनिष्ठा श्रीवास्तव की जिन्होंने अपने आपको कला चित्रकला क्षेत्र में अपने आपको समाहित करके चित्रकला के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले आर्टिस्ट मोहम्मद कमर की जीवनी पर गहन अध्ययन करके उनके जीवन को अपने शब्दों में पिरोने का काम कर रही इसी क्रम में उन्होंने अपने एक लेख में चित्रकार मोहम्मद कमर की जीवनी को सजाने का कार्य किया है।

वह लिखती है कि कोई भी कलाकार किसी गांव, शहर , जिला,या सूबे का नहीं बल्कि अपनी कलाकृतियों के माध्यम से राष्ट्र की पहचान होता है । उनकी जीवनी का परिचय देते हुए वह लिखती है कि ऐसे ही चित्रकार है डॉ० मोहम्मद क़मर जिनका जन्म रायबरेली में हुआ कला की शिक्षा लखनऊ कला महा विद्यालय ( लखनऊ विश्वविद्यालय ) में हुई । वर्ष 2006 में आप शहिदों की नगरी शाहजहापुर आये और यही के हो गए। अब तक 500 अधिक पेटिंग बनाने वाले क़मर ने अपने चित्रों से कला जगत में शाहजहांपुर को एक नया आयाम प्रदान किया । 28 फरवरी 2024 में शहिदों की नगरी में अंतरराष्ट्रीय कलाकार समूह आर्ट फैमली इंडिया के संस्थापक मोहम्मद तौक़ीर को श्रद्धांजलि स्वरूप नवनिर्मित आर्ट गैलरी का उद्‌घाटन किया । जिसने शहर को राष्ट्रीय नही अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई। अपका अनुभव अपकी कला यात्रा नवीन कलाकारों के लिए वरदान है। आपकी कलाकृतियों को देखने से लगता है आपकी चित्रकारी मे मन कहीं दुविधा में उलझा हुआ है वही कुछ पेंटिंग्स को देखकर लगता है। जैसे समस्त सकारात्मक ऊर्जा हमे अपनी ओर अकृषित कर रहीं हो मानो उलझन भरी जिन्दगी को शाति और और सुकून की ओर ले जा रही हो। आप अपनी पेटिंगस को इतनी गंभीरता से लेते है मानो वो चित्रकारी नही कर रहें स्वंम उस स्थिति को जी रहे है, चाहे वह वेदना , त्याग, दुविधा से भरी हो या प्राकृति के समस्त रंगो को अपने में समेटे हुए प्रतित होती है। उनकी पेंटिंग में इतना संतुलन है कि एक पेंटिंग में नाम लिखने की जगह ढूंढने के लिए उन्हे 10 साल का समय लग गया। इस बात से यह अंदाजा लगाया जा सकता है, इनका धैर्य, सहनशीलता तथा कल्पना शक्ति को किसी सिमित समय सीमा मे नहीं बांधा सकता। आपकी तूलिका रूपी नाव पर सवार होकर आकाश के रंगो को समेटते हुए सिंधु की गहराई मैं विद्यमान कुदरत को तथा जिंदगी की तपिश तथा परेशानियों, संघर्ष के तत्व तथा वेदना को रंगो और रेखाओं के सहारे कैनवास पर आविर्भूत करते हैं। मो0 क़मर के अधिकांष चित्र एक्रेलिक एवं जल रंगो में बनाये गये हैं। कुछ पेटिंग में ड्राई पेस्टल का प्रयोग प्रतित होता है। “चित्रकार डा० कमर रायबरेली विषिष्ट चित्रकार उनके पिता या यू कहे इनके प्रथम गुरू मो. तौकीर हैं। इनका परिवार प्रदेश में ही नहीं बल्कि कला जगत में देश और विदेश में आर्ट ˈफै़मलि के नाम से जानी जाता है। वह अभी तक देश – विदेश की 80 से अधिक कला प्रदर्शनियों मैं अपनी पेंटिंग को साझा कर चुके हैं। क़मर बताते हैं कि फ्रांस के अतिरिक्त बांग्लादेश, जर्मनी , इग्लैंड, अमेरिका आदि में उनके चित्र आर्ट गैलरी की शोभा बढ़ा रहे हैं। मुंबई , दिल्ली, कोलकाता लखनऊ, गोवा, जयपुर आदि उनके बनाए चित्रो को प्राथमिकता मिली।

डॉ० मोहम्मद क़मर की कलाकृतियाँ न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि व्यापक स्तर पर भी सराही गई हैं। उनकी कला में परंपरागत और आधुनिक तत्वों का समावेश हैं, उनकी निरंतर साधना और समर्पण हमे सोचने पर मजबूर करता है।, कि एक चित्रकार की चित्रकारी की गहराई को समझना इतना आसान नहीं है।

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