जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम हुए सख्त, अब विलंबित मामलों में बढ़ेगी प्रशासनिक प्रक्रिया
नई व्यवस्था आज से लागू, समय पर पंजीकरण कराने पर जोर
अमर बहादुर सिंह। नगरा बलिया
बलिया। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत विलंबित पंजीकरण के नियमों में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत एक वर्ष से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में पंजीकरण के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक सत्यापन और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक होगी।
नियमों के अनुसार, जन्म या मृत्यु की घटना के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना चाहिए। निर्धारित अवधि के भीतर पंजीकरण नि:शुल्क किया जाता है।
21 दिन से 1 वर्ष तक
यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 21 दिन के बाद, लेकिन एक वर्ष के भीतर कराया जाता है, तो निर्धारित विलंब शुल्क के साथ रजिस्ट्रार की अनुमति से पंजीकरण किया जाएगा।
1 वर्ष से 2 वर्ष तक
एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष तक पुराने मामलों में पंजीकरण के लिए जिलाधिकारी (DM), उपजिलाधिकारी (SDM) अथवा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश एवं आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
2 वर्ष से अधिक पुराने मामले
वहीं, दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) का आदेश अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था का मुख्य प्रभाव एक वर्ष से अधिक विलंब वाले पंजीकरण मामलों पर पड़ेगा। इसके माध्यम से जन्म एवं मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक प्रमाणिक और व्यवस्थित बनाने तथा विलंबित पंजीकरण में सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीकरण नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। जन्म प्रमाणपत्र का उपयोग शिक्षा, पहचान, सरकारी योजनाओं, पासपोर्ट सहित विभिन्न सेवाओं में किया जाता है, जबकि मृत्यु पंजीकरण कानूनी, उत्तराधिकार एवं विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
नागरिकों से अपील है कि जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीकरण निर्धारित समयसीमा के भीतर ही कराएं, ताकि भविष्य में विलंबित पंजीकरण की अतिरिक्त प्रक्रिया से बचा जा सके।
























