कोर्ट ने पूर्व फौजी की गिरफ्तारी पर तत्कालीन थाना प्रभारी सहित 7 पुलिस कर्मियों पर एफआईआर के दिए आदेश
बेटी ने पिता की अवैध गिरफ्तारी और घर में घुसकर युवतियों से अश्लीलता और मारपीट की करी थी शिकायत
मुजीब खान
शाहजहांपुर : जनपद के न्यायालय ने तत्कालीन थाना सदर बाजार प्रभारी बृजेश सिंह एवं अन्य सहयोगी सात पुलिस कर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने एवं इसकी जांच अन्य थाने के वरिष्ठ अधिकारी से करवाने के निर्देश दिए जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया कोर्ट ने उक्त आदेश एक रिटायर्ड फौजी की अवैध गिरफ्तारी की उसकी बेटी की शिकायत पर दिए है। रिटायर्ड फौजी की बेटी ने पिता की अवैध गिरफ्तारी और सदर प्रभारी व अन्य पुलिस कर्मियों पर लगाए थे उसके और उसकी बहनों के साथ अश्लीलता करने और मारपीट किए जाने के आरोप।
जानकारी के अनुसार घटना जनपद के थाना सदर बाजार क्षेत्र के एक मोहल्ले की है जिसमें एक रिटायर्ड फौजी को अवैध रूप से गिरफ्तारी किए जाने पर उसकी बेटी ने कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें उसने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी उनके पिता सत्यवीर को घर से उठाकर ले गए थे। उन्हें कई घंटों तक थाने में रखा गया और उसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। अगले दिन, पुलिस ने उन्हें एक पार्क के पास से गिरफ्तार दिखाया, जिसके लिए कथित तौर पर फर्जी कागजात तैयार किए गए। यह घटना सदर बाजार थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले की है। युवती के अनुसार, 3 मार्च की सुबह करीब 8:30 बजे, मोहल्ले के दिलीप सिंह (जो वर्तमान में बरेली की एसओजी टीम में तैनात हैं) ने अपने भाई के साथ उनके घर में घुसकर पिता के साथ मारपीट की। उन्होंने बचाने आए छोटे भाई को भी पीटा और छोटी बहन के साथ कथित तौर पर अश्लील हरकतें कीं। कुछ समय बाद, रामसंजीवन और नरेंद्र नामक दो व्यक्ति, जिन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया, उनके पिता को मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गए। वादनी ने दावा किया है कि घर से पिता को ले जाने के सीसीटीवी फुटेज, मोहल्ले और सदर बाजार थाने में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित है। उसने आरोप लगाया कि पिता को बिना किसी अपराध दर्ज किए, 14 मार्च की सुबह 9 बजकर 37 मिनट पर अवैध रूप से गिरफ्तार कर सदर थाने के कार्यालय अभिलेख के अंदर बनी लॉकअप में बंद कर दिया गया। वादनी के अनुसार, इसके साक्ष्य भी थाना सदर बाजार में लगे सीसीटीवी कैमरों में मौजूद हैं। उसने आरोप लगाया है कि सदर बाजार थाने के अधिकारियों और कर्मचारियों ने एसओजी टीम बरेली के सदस्य दिलीप सिंह के साथ मिलकर एक षड्यंत्र के तहत उनके पिता को अवैध रूप से गिरफ्तार किया। उन्हें थाने में लगभग छह घंटे तक रखने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। पीड़िता की शिकायत के अनुसार, उनके पिता को 14 मार्च की शाम चार बजे एफआईआर दर्ज होने के समय से ही सदर थाने में बंद रखा गया था। उन्हें न्यायालय नहीं भेजा गया और 15 मार्च की शाम छह बजे तक अवैध हिरासत में रखा गया। पुलिस ने 15 मार्च की शाम चार बजे मोहल्ला चिनौर स्थित अवंती बाई पार्क के पास से गिरफ्तारी के कूटरचित दस्तावेज बनाए। पीड़िता ने थाने पहुंचकर इस कार्रवाई का विरोध किया और आलाधिकारियों से शिकायत कर सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की। आरोप है कि इस दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजेश सिंह भड़क गए और पीड़िता के साथ मारपीट की। पीड़िता ने अपने पिता के साथ हुई घटना को गलत बताते हुए कोर्ट से संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
पीड़िता ने कोर्ट से 14 मार्च की सुबह 9 बजे से 15 मार्च की शाम छह बजे तक की सदर थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग तत्काल संरक्षित करने का आदेश देने की मांग की थी। साथ ही, बरेली एसओजी में तैनात दिलीप सिंह के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्डिंग कराने की भी मांग की गई। पीड़िता ने कहा कि इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी खुद आरोपी हैं।
कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थाना सदर बाजार के प्रभारी निरीक्षक को सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। आदेश में यह भी कहा गया कि चूंकि इस मामले में थाना सदर बाजार के पुलिसकर्मी संलिप्त हैं, इसलिए इस आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक को भेजी जाए ताकि वे इस प्रकरण की विवेचना किसी अन्य थाना क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कराना सुनिश्चित करें।
बच्ची से छेड़छाड़ के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी
पुलिस की ओर से बताया गया कि युवती के पिता ने सिपाही दंपती की बेटी से छेड़छाड़ की थी। थी। बच्ची के पिता बरेली एसओजी में तैनात हैं। उन्होंने थाने पर फोन से सूचना दी थी। जिसके बाद आरोपित व सिपाही को थाने बुलाया गया था। घटना की जानकारी लेने के बाद दोनों को जाने दिया गया। बच्ची की मां की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपित सेवानिवृत्त फौजी को 15 मार्च को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। युवती के अधिवक्ता प्रियम सिंह ने बताया कि जब न्यायालय ने पुलिस से सीसीटीवी की रिकार्डिंग मांगी गई तो 15 दिन से अधिक पुरानी फुटेज उपलब्ध नहीं है। प्रियम ने बताया कि पुलिस की ओर से स्वीकार किया गया कि 14 मार्च को रामसंजीवन व नरेंद्र सिपाही सेवानिवृत्त फौजी को थाने जाए, लेकिन दोनों की रवानगी व फौजी को लाने का विवरण दर्ज नहीं है। महिला दारोगा साक्षी चौधरी गिरफ्तारी टीम में शामिल थीं, लेकिन थाने में आने के बाद 15 मार्च को उनकी रवानगी किसी भी टीम के साथ नहीं है। उन्होंने बताया कि सीजेएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सदर बाजार के प्रभारी निरीक्षक को आरोपित पुलिसकर्मियों समेत सभी सात लोगो के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रकरण में सदर के पुलिसकर्मी संलिप्त हैं, इसलिए एसपी को इस प्रकरण की विवेचना किसी अन्य थाना क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी से कराने के लिए पत्र भेजा गया है।
























