मेरठ : रिश्वत को अनार कहने वाला दरोगा रंगे हाथ गिरफ्तार मुकदमे से नाम हटाने को मांगे थे दो किलो अनार

 रिश्वत को अनार कहने वाला दरोगा रंगे हाथ गिरफ्तार मुकदमे से नाम हटाने को मांगे थे दो किलो अनार

10 हजार को एक किलो अनार कहता था 20 हजार लेते एंटीकरप्शन टीम ने रंगे हाथ पकड़ा

मुजीब खान

मेरठ । उत्तर प्रदेश में शायद कोई दिन ऐसा नहीं होता होगा जिस दिन जनता की गाड़ी कमाई को रिश्वत के नाम पर छीनता हुआ कोई भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी पकड़ा न जाता हो रिश्वतखोरी के विरुद्ध इतनी कार्यवाहियों के होने के बावजूद भी रिश्वतखोरी में कमी नहीं आ रही और प्रति दिन कोई न कोई एंटीकरप्शन टीमों के जाल में फंसता जा रहा है वैसे तो रिश्वतखोर अधिकारी या कर्मचारी सीधे सीधे रुपयो को डिमांड करते है लेकिन मेरठ के गंगा नगर थाने में तैनात एक दरोगा जी ने तो रिश्वत का नाम ही बदल कर उसका नाम अनार रख दिया और एक किलो अनार की कीमत 10 हजार रूपये रख दी जो एक मुकदमे में से नाम निकाले जाने को लेकर दो किलो अनार यानी 20 हज़ार रुपए लेते एंटीकरप्शन टीम के हाथ चढ़ गए।

मामला जनपद के थाना गंगानगर का है जहां तैनात दारोगा चंद्रप्रकाश कल दोपहर करीब 2 बजे एक पीड़ित से उसका फर्जी मुकदमे में से नाम निकाले जाने के एवज में दो किलो अनार यानी 20 हज़ार रूपये ले रहे 1993 बैच के दरोगा प्रकाश चंद्र ने इन्वेस्टिगेशन के नाम पर रिश्वत मांगी थी। दरोगा ने कोडवर्ड में कहा- 2 किलो अनार लाना। पीड़ित ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से कर दी। इसके बाद टीम ने दरोगा को रंगे हाथ पकड़ने के लिए पीड़ित से फोन करवाया। उसने दरोगा से कहा- अनार लेकर आया हूं। इस पर दरोगा ने कहा- पुलिस लाइन के गेट नंबर- 3 के पास आ जाओ। वहां दरोगा गाड़ी के पास खड़ा था। अंदर जाकर युवक ने दरोगा को जैसे ही 20 हजार रुपए पकड़ाए, एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद दरोगा को सिविल लाइंस थाने लाया गया। यहां उससे पूछताछ की गई।

जानकारी के अनुसार मुजफ्फरनगर के शामली स्थित गांव घटायन में संगीता परिवार के साथ रहती हैं। कुछ महीने पहले संगीता ने पैसों की तंगी के चलते अपनी एक जमीन का सौदा गंगानगर के रहने वाले अपने रिश्तेदार नमन चौधरी से किया। नमन ने एक महीने में रजिस्ट्री कराने की बात कही। लेकिन, एक महीने में वह रुपए की व्यवस्था नहीं कर पाया। दबाव बना तो उसने सौदा कैंसिल कर दिया और अपना एडवांस का पैसा मांगने लगा। संगीता की तरफ से उत्तराखंड के लिब्बाहेड़ी में रहने वाले उनके भांजे दीपक ने नमन चौधरी से बात करने की कोशिश की। लेकिन, नमन ने कुछ भी मानने से मना कर दिया। वह पैसे लौटाने का दबाव बनाने लगा। कई बार वह धमकी भी दे गया। संगीता ने नमन से कहा कि उन्होंने जमीन का सौदा इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें उधारी चुकानी थी। फिर भी नमन नहीं माना। नमन चौधरी का दबाव बढ़ता जा रहा था। इस पर संगीता ने गांव के लोगों की मदद से पंचायत बुलाई। इसमें तय कर दिया गया कि जब संगीता की जमीन बिक जाएगी, तब नमन चौधरी से एडवांस के रूप में लिया गया पैसा लौटा दिया जाएगा। नमन ने भी पंचायत के सामने उस बात को मान लिया और मामला शांत हो गया। पंचायत होने के बाद सब कुछ शांत हो चुका था, लेकिन नमन शांत नहीं बैठा। उसने मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद 31 मई, 2026 की सुबह करीब 5 बजे गंगानगर थाने में तैनात दरोगा प्रकाश चंद्र पुलिस लेकर संगीता के मुजफ्फरनगर स्थित घर पहुंचा। पूछने पर खुलासा हुआ कि नमन ने पवन कुमार, संगीता और संगीता के बेटे नवनीत के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमे में पापा पवन कुमार का नाम आने के बाद दीपक ने गंगानगर थाने जाकर दरोगा प्रकाश चंद्र से मुलाकात की। बताया कि यह मुकदमा झूठा दर्ज किया गया है। लेकिन, दरोगा ने कुछ भी मानने से इनकार कर दिया। दीपक ने दरोगा से गुहार लगाई कि वह केवल सच्ची जांच करे। दरोगा ने सच लिखने के लिए 2 लाख रुपए की मांग करनी शुरू कर दी। इसके बाद दरोगा प्रकाश चंद्र से लगभग रोज ही दीपक की बात होने लगी थी। दीपक ने कहा कि वह दो लाख रुपए नहीं दे सकते। इसके बाद दरोगा ने पहले एक लाख रुपए और फिर 50 हजार रुपए मांगने लगा। 23 जून को दीपक ने दोबारा संपर्क किया और कहा कि वह 20 हजार रुपए दे सकता है। कल सुबह दीपक ने दरोगा प्रकाश चंद्र को फोन किया। दरोगा ने उसे पुलिस लाइन के गेट नंबर- 3 पर बुलाया। जैसे ही 20 हजार रुपए दिए, एंटी करप्शन ने उसे दबोच लिया।

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