युगऋषि पं.श्रीराम शर्मा आचार्य की पुण्यतिथि पर किया पूजन
– भारत सरकार ने 1991 में युगऋषि वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की प्रथम पुण्यतिथि पर जारी किया स्मारक डाक टिकट और
वहीं अखिल विश्व गायत्री परिवार गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के स्वर्ण जयंती वर्ष पर दूसरी बार 2021 में जारी किया।
संजीव शर्मा ।बदायूं
भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के महानायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, परम पूज्य गुरुदेव युगऋषि वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की पुण्यतिथि पर प्रखर बाल संस्कारशाला के कैंप कार्यालय पर वेद मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया गया। विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए।
गायत्री शक्तिपीठ के वरिष्ठ ट्रस्टी सुखपाल शर्मा ने कहा कि युगऋषि वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की
प्रथम पुण्यतिथि पर 27 जून 1991 को भारत सरकार ने उनके अद्वितीय राष्ट्र एवं समाजसेवी योगदान का सम्मान करते हुए उनकी स्मृति में एक रुपये के 8 लाख स्मारक डाक टिकट जारी किए। राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित गरिमामय राष्ट्रीय समारोह में तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा ने इसका विधिवत विमोचन किया। वहीं अखिल विश्व गायत्री परिवार गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के स्वर्ण जयंती वर्ष (1971-2021) के उपलक्ष्य में दूसरी बार भारत सरकार ने पांच रुपये मूल्य का 402525 टिकट जारी किए।
गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि युगऋषि पं.श्रीराम शर्मा आचार्य का जीवन राष्ट्रभक्ति, तप, त्याग, सेवा और आध्यात्मिक क्रांति का अद्भुत संगम रहा। युवावस्था में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया और आजादी के बाद समाज में नैतिक एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण का विराट अभियान प्रारंभ किया। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव मात्र के उत्थान, विचार क्रांति और चरित्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। आचार्यश्री ने अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार), ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान, गायत्री तपोभूमि मथुरा, अखण्ड ज्योति संस्थान मथुरा जैसे संस्थानों की स्थापना कर अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय का नया अध्याय प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि वेदमूर्ति पंडित श्रीराम द्वारा लिखित 3200 से अधिक पुस्तकों, 25 ग्रह-नक्षत्रों, 19वां पुराण प्रज्ञा पुराण, चारों वेदों का भाष्य, 81 से अधिक वाड़्मय और अनेकों ग्रंथ आज भी जीवन निर्माण और व्यक्तित्व विकास के मार्गदर्शक माने जाते हैं।
गायत्री परिवार के वरिष्ठ परिजन रघुनाथ सिंह ने कहा कि परम पूज्य गुरुदेव ने गायत्री साधना, यज्ञ संस्कृति, संस्कार परंपरा, नारी जागरण, युवा चेतना, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और सामाजिक समरसता जैसे अभियानों को जन-जन तक पहुंचाया।
गायत्री परिवार के इं.नत्थूलाल शर्मा ने कहा कि युगऋषि का उद्घोष “हम बदलेंगे—युग बदलेगा, हम सुधरेंगे—युग सुधरेगा” आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका मानना था कि समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम व्यक्ति का आत्मपरिष्कार है। इसी विचार को आधार बनाकर उन्होंने विचार क्रांति अभियान चलाया, जिसने देश-विदेश में लाखों लोगों को संयम, सेवा, सदाचार और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में प्रेरित किया। श्रीराम शर्मा आचार्य ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने जीवन को राष्ट्र और समाज के लिए उपयोगी बनाएं। उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कार, विज्ञान के साथ अध्यात्म और प्रगति के साथ मानवीय मूल्यों के समन्वय पर विशेष बल दिया। उनके मार्गदर्शन में प्रारंभ हुए लाखों यज्ञ, संस्कार, प्रज्ञा संस्थान, विश्व भर में 24000 से अधिक शक्तिपीठ और प्रज्ञा मंडल आज भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन का कार्य कर रहे हैं।
इस मौके पर मृत्युंजय शर्मा, देवेंद्र पाल, मान्या शर्मा, भूमि शर्मा, दीप्ति शर्मा, सौरभ आदि मौजूद रहे।
























