रेड स्पाइडर माइट बना गन्ने की मिठास का दुश्मन , विभाग ने किसानो सतर्क रहने की दी सलाह
डीसीओ खुशीराम भार्गव ने किसानों को बताये रेड स्पाइडर के प्रकोप से गन्ने की फसल को सुरक्षित करने के उपाय
मुजीब खान
पीलीभीत : जनपद में गन्ने की फसल में रेड स्पाइडर माइट ( मकड़ी ) का प्रकोप बढ़ने पर जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम भार्गव ने किसानों से इस कीट को मिठास का दुश्मन बताते हुए इससे सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि यह सूक्ष्म कीट पत्तियों की निचली सतह से रस चूसकर फसल को क्षति पहुंचाता है, जिससे पत्तियों पर पीले अथवा सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं तथा अधिक प्रकोप की स्थिति में पत्तियां सूखने लगती हैं। जिसके परिणाम स्वरूप प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है तथा उपज में कमी आ सकती है।
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि माइट के प्रभावी नियंत्रण हेतु समेकित कीट प्रबंधन ( आईपीएम ) अपनाना आवश्यक है। किसानों को खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखनी चाहिए तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाना चाहिए। नाइट्रोजन उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग माइट प्रकोप को बढ़ावा दे सकता है। खेतों को खरपतवार मुक्त रखें तथा अत्यधिक प्रभावित पत्तियों को काटकर नष्ट कर दें।
उन्होंने बताया कि जैविक नियंत्रण के अंतर्गत नीम आधारित उत्पादों का प्रयोग लाभकारी सिद्ध होता है। साथ ही मित्र जीवों एवं प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण किया जाना चाहिए। भौतिक नियंत्रण के रूप में पत्तियों की निचली सतह पर पानी की तेज फुहार देने से माइट की संख्या में कमी लाई जा सकती है।
डीसीओ ने बताए स्पाइडर माइट से बचाव के उपाय
जिला गन्ना अधिकारी ने कृषकों को सलाह दी कि नियमित रूप से अपनी फसल का निरीक्षण करें तथा प्रकोप अधिक होने पर कृषि विशेषज्ञों की संस्तुति के अनुसार अनुशंसित माइटनाशी रसायनों का प्रयोग करें। दवा का छिड़काव करते समय पत्तियों की निचली सतह को विशेष रूप से कवर किया जाए, क्योंकि माइट मुख्यतः वहीं पाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि केवल रासायनिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय जैविक, सांस्कृतिक, भौतिक एवं रासायनिक उपायों के समन्वित प्रयोग से ही माइट का प्रभावी एवं पर्यावरण-अनुकूल नियंत्रण संभव है। गन्ना विकास विभाग किसानों को समय-समय पर तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
























