लखनऊ।ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के विरुद्ध डाली याचिका पर हाईकोर्ट सख्त सरकार व आयोग से मांगा जवाब

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के विरुद्ध डाली याचिका पर हाईकोर्ट सख्त सरकार व आयोग से मांगा जवाब

याचिकाकर्ता ने प्रधानों को प्रशासक बनाना कानून के खिलाफ बताया कोर्ट 10 जून तक मांगा जवाब

पी. के. श्रीवास्तव

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव कराने के स्थान पर पंचायत चुनाव का कार्यकाल बढ़ाते हुए सभी प्रधानों को प्रशासक बना दिया जिस पर ओम प्रकाश प्रजापति एडवोकेट ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए सरकार के प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने को कानून के खिलाफ बताते हुए एक जनहित याचिका डाली जिसमें याची ने यह कहा कि सरकार द्वारा लिया गया निर्णय प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाये जाने जैसा है जो नियम विरुद्ध है याचिका को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए सरकार के निर्णय पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए सख्त रुख अपनाते हुए आगामी 10 जून को सरकार एवं आयोग से स्पष्टीकरण तलब किया है।

याचिकाकर्ता ओमप्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल जनहित याचिका में कहा गया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से केवल पांच वर्ष का होता है। ऐसे में चुनाव न कराकर और निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाकर सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से उनका कार्यकाल बढ़ा दिया है, जो कानून की मंशा के विपरीत है।

याचिका में यह भी मांग की गई कि यदि समय पर पंचायत चुनाव नहीं हो पा रहे हैं तो पूर्व व्यवस्था के अनुसार एडीओ पंचायत या किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाए, न कि पूर्व प्रधानों को।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे, इसकी जानकारी निश्चित रूप से प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूरा चुनावी शेड्यूल और समय सीमा मांगी है। साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट भी अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार और आयोग को विस्तृत जवाब देना होगा। की आखिर पंचायत चुनाव कब करवाएंगे।

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