हाईकोर्ट के निर्देश पर 5 माह बाद सपा पार्षद लालित तिवारी को मिला न्याय मेयर सुषमा खर्कवाल ने दिलाई शपथ
मुजीब खान
लखनऊ : महानगर लखनऊ के नगर निगम में पांच माह पूर्व हुए चुनाव में पार्षद का चुनाव जीतने वाले समाजवादी पार्टी के पार्षद ललित तिवारी को बीजेपी की महापौर सुषमा खर्कवाल द्वारा शपथ न दिलाये जाने का मामला इलाहाबाद उच्चन्यालय की लखनऊ बेंच के पास पहुंचा जिस पर हाईकोर्ट ने सख्त होते हुए इसका दोषी महापौर सुषमा खर्कवाल को ठहराते हुए शपथ न दिलाये जाने तक उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारी सीज कर दिए थे। जिसमे आज महापौर द्वारा कोर्ट के आदेश पर ललित तिवारी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई ललित तिवारी जिस वार्ड से चुनाव लड़े थे वहां बीजेपी पार्षद के चुनाव रद्द हो गया था और वही से वह चुनाव जीते थे। समाजवादी पार्टी का आरोप है महापौर अपनी पार्टी के प्रत्याशी का चुनाव रद्द होने और समाजवादी पार्टी के चुनाव जीतने से खिन्न चल रही थी बस इसी कारण वह शपथ नहीं ग्रहण करवा रही थीं।
लखनऊ की बीजेपी मेयर सुषमा खर्कवाल ने रविवार को सपा पार्षद ललित तिवारी को पार्षद पद की शपथ दिला दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज किए जाने के तीन दिन बाद यह शपथ ग्रहण संपन्न हुआ। शपथ दिलाते ही मेयर के अधिकार भी बहाल हो गए। शपथ ग्रहण समारोह लालबाग स्थित नगर निगम कार्यालय में आयोजित किया गया। शुरुआत में सभी लोग राजकुमार हॉल में एकत्र हुए थे, लेकिन बाद में मेयर ने अपने चैंबर में शपथ दिलाने का निर्णय लिया। नगर आयुक्त और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में फैजुल्लागंज वार्ड से निर्वाचित घोषित किए गए ललित तिवारी ने पार्षद पद की शपथ ली।
यह मामला निकाय चुनाव-2023 से जुड़ा हुआ है। चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने ललित तिवारी को 1672 वोटों से हराया था। बाद में ललित तिवारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि प्रदीप शुक्ला ने अपने चुनावी हलफनामे में दूसरी शादी की जानकारी छिपाई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपों को सही मानते हुए भाजपा प्रत्याशी का निर्वाचन रद्द कर दिया और दूसरे स्थान पर रहे ललित तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित करने का आदेश दिया।
शपथ ग्रहण में हुई देरी पर मेयर सुषमा खर्कवाल ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि एक महीने पहले वह मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में गई थीं, जहां देशभर के कई मेयर और नगर आयुक्त शामिल हुए थे। वहां से लौटने के बाद उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई और उन्हें सेना के अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। शनिवार शाम अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद रविवार सुबह शपथ ग्रहण करा दिया गया।
मेयर ने कहा कि आमतौर पर ऐसे मामलों में चुनाव निरस्त कर दोबारा मतदान कराया जाता है, लेकिन अदालत ने दूसरे नंबर के प्रत्याशी को शपथ दिलाने का आदेश दिया, जिसका नगर निगम ने पालन किया। वहीं, ललित तिवारी ने इसे न्याय की जीत बताते हुए वार्ड की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया। आपको बता दें हाईकोर्ट में इस केस की अगली सुनवाई 29 मई को है। कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में महापौर को चेतावनी भी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक भी आदेश का पालन नहीं हुआ तो उन्हें उपस्थित होना पड़ेगा। साथ ही कोर्ट को यह बताना होगा कि उनके खिलाफ क्यों न अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए।
























