नगरा में आस्था का केंद्र बना पुरानी दुर्गा मंदिर, नवरात्र में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
रामेश्वर प्रजापति छांगुर
नगरा/बलिया
नगरा क्षेत्र स्थित पुरानी दुर्गा मंदिर वर्षों से श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से माता के दर्शन करने से बड़ी से बड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। यही कारण है कि दूर-दराज के गांवों से भी श्रद्धालु यहां आकर माथा टेकते हैं और अपनी मनोकामनाएं माता के चरणों में अर्पित करते हैं।
मंदिर की विशेषता यह है कि यहां केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामाजिक आस्थाएं भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। शादी-विवाह जैसे शुभ कार्यों से पहले लोग यहां आकर माता का आशीर्वाद लेना जरूरी मानते हैं।परिवारों में यह परंपरा बन चुकी है कि विवाह से पूर्व “दिखावटी” (रिश्ता तय होने की रस्म) भी माता के दरबार में की जाती है।
हर वर्ष चैत्र माह में नवरात्रि के दौरान यह मंदिर भक्ति के रंग में रंग जाता है। दर्जनों गांवों की महिलाएं माता को “खपर” (चढ़ावा) चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचती हैं। पूरे दस दिनों तक पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और श्रद्धा का अद्भुत माहौल बना रहता है।
मंदिर में नियमित रूप से शिव चर्चा का आयोजन भी होता है, जिसमें महिला, पुरुष और बच्चे बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। इसके साथ ही सुबह और शाम की आरती में भी श्रद्धालुओं की अच्छी भागीदारी रहती है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
वहीं, दशहरा नवमी के अवसर पर यहां विशेष आयोजन होता है, जहां रामलीला और मेले का भव्य दृश्य देखने को मिलता है। इस दौरान भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मंदिर के पुजारी मुन्ना पंडित के अनुसार, “माता दुर्गा अत्यंत जागृत और चमत्कारी हैं। सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद माता अपने तरीके से पूरी करती हैं।” उन्होंने बताया कि श्रद्धालु माता शारदा स्वरूप में भी पूजा करते हैं और शिक्षा, विवाह, स्वास्थ्य सहित विभिन्न मनोकामनाओं के लिए यहां आते हैं।
इस प्रकार नगरा का पुरानी दुर्गा मंदिर केवल एक पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक विश्वास का जीवंत केंद्र बन चुका है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु माता का आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं।
























