
इंटरनेशनल साइबर क्राइम कॉन्फ्रेंस 2026 में गूंजा मुद्दा, तकनीक को कानून से जोड़ना जरूरी
जौनपुर। साइबर टेक्नो अटॉर्नीज और शिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को इंटरनेशनल साइबर क्राइम कॉन्फ्रेंस 2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन गोपनीयता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की।
मुख्य वक्ता के रूप में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि सोशल मीडिया पर अपराध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में युवाओं को सतर्क रहने और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तकनीकी जानकारी के साथ जन-जागरूकता अभियान भी जरूरी है।
मुख्य सत्र में उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक एवं उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान, लखनऊ के संस्थापक निदेशक डॉ. जी. के. गोस्वामी (आईपीएस) ने कहा कि तकनीक और कानून का साथ होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानून तकनीक में अनुशासन लाता है और इससे लोगों का भरोसा बढ़ता है। साथ ही उन्होंने एआई से प्राप्त सूचनाओं की सत्यता जांचने पर जोर दिया।
नेपाल सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल के वाइस प्रेसिडेंट सप्तकोटा ने साइबर अपराध को वैश्विक चुनौती बताया। एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ के डॉ. राजीव कुमार सिंह ने एआई और कानून के संतुलन पर विचार रखे। साइबर विशेषज्ञ मोहम्मद हसन जैदी ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर कानून की जानकारी दी।
डॉ. सृजन मिश्रा ने सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संतुलन पर प्रकाश डाला। अहमद मेहंदी ने साइबर सुरक्षा पर व्याख्यान दिया, जबकि सना नासिर ने ऑनलाइन उत्पीड़न के मानसिक प्रभावों पर चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन न्यूज एंकर मुमताज ने किया और अतिथियों का स्वागत डॉ. मिर्जा यासूब अब्बास ने किया। इस अवसर पर कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
























