जौनपुर।किताब के बदले सर्वमान्य किताब लिखी बाबा साहेब ने संविधान के साथ समता, शिक्षा के भी शिल्पी थे अंबेडकर-डॉ. सुनील कुमार
किताब के बदले सर्वमान्य किताब लिखी बाबा साहेब ने संविधान के साथ समता, शिक्षा के भी शिल्पी थे अंबेडकर-डॉ. सुनील कुमार
सोए हुए समाज के लिए रातभर जागकर पढ़ते थे बाबा साहेब
जौनपुर।14 अप्रैल को हम उस महान विभूति की जयंती मनाते हैं, जिन्होंने 251 पन्नों और 1.5 लाख शब्दों का भारत का संविधान लिखा। भारत की सामाजिक, राजनीतिक और विधिक नींव को न केवल मज़बूती दी, बल्कि उसे मानवाधिकार और समता की भावना से सिंचित भी किया। डॉ. भीमराव अंबेडकर जिन्हें स्नेह और श्रद्धा से 'बाबा साहेब' कहा जाता है। सिर्फ भारत के संविधान निर्माता नहीं थे, बल्कि एक युगप्रवर्तक चिंतक, समाज सुधारक, शिक्षाविद और दलितों के मसीहा भी थे। उनके योगदान से अभिभूत होकर सरकार ने बाबा साहेब को भारत रत्न से नवाजा। अन्य देशों के लिखे संविधान कुछ ही वर्षों में फेल होने लगे लेकिन बाबा साहेब का लिखा संविधान आज भी देश में ही नहीं दुनिया में सराह...








