बरेली में बीजेपी को बड़ा झटका “बीजेपी को टाटा बाय बाय ” कहने के सायकिल पर सवार हुए धर्मेंद्र कश्यप
बेटी कीर्ति कश्यप संग सपा मुखिया अखिलेश से भेंट कर थामा सपा का दामन बेटी लड़ेगी विधानसभा चुनाव
मुजीब खान
लखनऊ/बरेली । विगत कई दिनों से बीजेपी के राज्यसभा चुनाव टिकट देने के बाद से नाराज चल रहे दो बार के सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने वास्तव में बीजेपी को बाय बाय करते हुए रविवार शाम समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव के साथ अपनी बेटी कीर्ति कश्यप संग मुलाकात करके समाजवादी का दामन थाम कर अब सायकिल की सवारी शुरू कर दी उन्होंने अपने इस फैसले पर बीजेपी पर पिछड़ा वर्ग का अपमान किए जाने और गद्दार लोगों को अगली पंक्ति में बैठकर सम्मान देने का आरोप लगाते हुए बीजेपी में घुटन होने को बात भी कही ।
आपको बताते चले कि इससे पहले धर्मेंद्र कश्यप बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक हुआ करते थे पार्टी ने उन्हें मंत्री भी बनाया था लेकिन केंद्र में मोदी सरकार आने से पूर्व वह समाजवादी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे और पार्टी के टिकट से दो बार आंवला लोकसभा से सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे लेकिन इस बार 2023 के लोकसभा चुनाव में वह समाजवादी पार्टी के नीरज मौर्य कुशवाह से करीब 14 हजार वोटो से चुनाव हार गए तबसे उनका आरोप था कि उनको बीजेपी के धर्मपाल सिंह व अन्य लोगों ने मिलकर चुनाव हरवाया है हद तो तब हुई जब उन्हीं धर्मपाल सिंह और पूर्व सांसद एवं वर्तमान राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा चुनाव का टिकट दिया गया जिसके लिए धर्मेंद्र कश्यप अपनी बेटी कीर्ति के लिए आशा लगाए बैठे थे । बस यही उनके हृदय में पनप रही बीजेपी पार्टी के लिए नाराजगी सामने आ गई और उन्होंने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर ” टाटा बाय बाय” लिखकर राजनीतिक खेमे में हलचल मचा दी उनके इतने शब्द लिखने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि जिन लोगों ने उन्हें चुनाव हरवाया उन गद्दार नेताओं को अग्रिम पंक्ति में बीजेपी ने बैठाने का कार्य किया है इस लिए बीजेपी अब पिछड़ों को सम्मान नहीं दे रही इस लिए ऐसा लिखना स्वाभाविक है उनके इस बयान से जहां बीजेपी के शीर्ष नेता उन्हें मनाने में लगे रहे वही समाजवादी पार्टी के नेताओं ने उनसे संपर्क साधना शुरू कर दिए जिसका परिणाम कल शाम उन्होंने लखनऊ जाकर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया और तमाम अटकलों पर विराम लगाने का काम करते हुए बरेली मे बीजेपी बड़ा झटका देने का काम किया।
कश्यप बिरादरी के सर मौर है धर्मेंद्र कश्यप बरेली में कामयाब हुआ सपा का पीडीए अभियान
यदि देखा जाए तो तो मंडल के सभी जिलों में कश्यप बिरादरी की एक बड़ी संख्या है जो अधिकतर बीजेपी में अपना वोट डालते है लेकिन धर्मेंद्र कश्पय को अपना नेता मानते है और बीजेपी छोड़ने से पूर्व मंडल के सभी बिरादरी के लोगो संग बैठकें करके राय ली जिसमें सबकी सहमति के बाद ही धर्मेंद्र कश्यप ने बीजेपी का दामन छोड़कर सपा का दामन थाम लिया इससे साफ हो गया कि धर्मेंद्र कश्यप के सपा ज्वाइनिंग से बरेली में सपा का पीडीए अभियान सफल हुआ है क्योंकि धर्मेंद्र कश्यप ने भी पिछड़ों का अपमान लगाकर ही बीजेपी को टाटा बाय बाय कहा है।
बरेली की बिथरी चैनपुर से बेटी को लड़ाएंगे विधानसभा चुनाव
बीजेपी छोड़ने के समय धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप भी उनके साथ अखिलेश यादव से मिली थी जो बरेली के बिथरी चैनपुर से आगामी 2027 में विधानसभा चुनाव का टिकट मांग रही है और पार्टी ज्वाइनिंग से पूर्व अखिलेश यादव से धर्मेंद्र कश्यप ने बेटी के टिकट केजी डिमांड भी की है जिसको शायद स्वीकार भी कर लिया गया है क्योंकि धर्मेंद्र कश्यप इसी विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़कर विधायक बने थे और सपा ने उन्हें मंत्री भी बनाया था लेकिन 2014 चुनाव में उन्होंने समाजवादी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन करके बरेली को आंवला लोकसभा से सांसद का चुनाव लड़ा था जहां से वह दो बार बीजेपी संसद बने लेकिन 2023 में सपा के नीरज मौर्य कुशवाह ने उन्हें 14 हजार वोट से पराजित कर दिया था जिसका आरोप उन्होंने बीजेपी के नेताओं पर भीतरघात करने का लगाया था अब उन्हीं नेताओं को राज्यसभा चुनाव का टिकट देकर बीजेपी ने उनके जले पर नमक छिड़कने का कार्य किया जिसके बाद वह बीजेपी से बागी हो गए।
























