एसआईटी का शिकंजा कसते ही इनामी दरोगा ने टेका घुटना, पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में सरेंडर
जलालपुर के दो नामजद आरोपी भी कर चुके हैं आत्मसमर्पण, कथित वसूली के नेटवर्क की जांच में जुटी पांच सदस्यीय एसआईटी
जौनपुर। पुलिस की वर्दी और पद की आड़ में कथित जबरन वसूली व लूट के मामलों में एसआईटी की कार्रवाई तेज हो गई है। सुरेरी के तत्कालीन थानाध्यक्ष और 25 हजार रुपये के इनामी उपनिरीक्षक दिव्य प्रकाश सिंह ने सोमवार को पुलिस की दबिशों के बीच न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं जलालपुर मामले में नामजद संकीत सिंह और विकास भी पहले ही कोर्ट में सरेंडर कर चुके हैं।
दोनों मामलों में निलंबित सिपाही सत्येंद्र कुमार गौड़ और विष्णु सिंह समेत तीन आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसआईटी अब कथित वसूली में इस्तेमाल बैंक खातों, यूपीआई लेनदेन, मोबाइल नंबरों और आरोपितों के आपसी संपर्कों की जांच कर रही है।
सुरेरी में 1.65 लाख की कथित वसूली
सुरेरी थाने में 22 सितंबर को दर्ज मुकदमे में राजेंद्र दूबे समेत कई लोगों को नामजद किया गया है। शिकायत के अनुसार 13 सितंबर को पीड़ित को बुलाकर सादे कपड़ों में मौजूद लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए वाहन में बैठाया और कथित तौर पर करीब 1.65 लाख रुपये की वसूली की। रकम यूपीआई के जरिए वंशनरायन गिरी के खाते में भेजे जाने का आरोप है।
जांच में पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका सामने आने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह को निलंबित किया गया। बाद में उन पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। पुलिस की दबिशों के बीच उन्होंने गिरफ्तारी से पहले ही न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
जलालपुर में 2.15 लाख की कथित वसूली
जलालपुर थाने में 17 सितंबर को दर्ज मुकदमे में संकीत सिंह, विकास समेत अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया है। शिकायत के अनुसार पीड़ित को वाहन में ले जाकर मारपीट व धमकी देने के बाद मोबाइल के जरिए अलग-अलग खातों में करीब 2.15 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। एटीएम से रकम निकाले जाने का भी आरोप है।
पुलिस की कार्रवाई के बीच नामजद संकीत सिंह और विकास ने 23 सितंबर को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था।
पांच सदस्यीय एसआईटी कर रही जांच
दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी ने 22 सितंबर को पांच सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। एएसपी ग्रामीण आतिश कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में एएसपी/सीओ नगर गोल्डी गुप्ता के नेतृत्व में टीम जांच कर रही है। एसआईटी कथित वसूली की रकम के लेनदेन और उससे जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
























