बदायूँ।निजी नर्सिंग होम में प्रसूता की मौत से बवाल, परिजनों का हंगामा

निजी नर्सिंग होम में प्रसूता की मौत से बवाल, परिजनों का हंगामा

इलाज में लापरवाही का आरोप, अस्पताल सील करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग • पुलिस जांच में जुटी, स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
बदायूं। शहर के कोतवाली क्षेत्र स्थित शेखूपुर रोड के एक निजी नर्सिंग होम में प्रसूता की मौत के बाद सोमवार सुबह माहौल तनावपूर्ण हो गया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह परिजनों को शांत कराया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
जानकारी के अनुसार, सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के शेखूपुर निवासी अमित ने 15 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर अपनी 25 वर्षीय पत्नी सुमन को शेखूपुर रोड स्थित रहनुमा अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षित प्रसव का भरोसा दिलाते हुए 30 से 40 हजार रुपये खर्च होने की बात कही थी। भरोसा कर उन्होंने प्रसूता को अस्पताल में भर्ती करा दिया।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में योग्य विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है और अधिकांश कार्य अप्रशिक्षित स्टाफ से कराया जाता है। आरोप है कि रविवार को सुमन की हालत बिगड़ने लगी, लेकिन समय रहते उचित उपचार देने या किसी उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर करने के बजाय लगातार इंजेक्शन लगाए जाते रहे। देर रात उसकी मौत हो गई।

मौत की खबर मिलते ही परिजन और अन्य लोग अस्पताल पहुंच गए तथा अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और हंगामा किया। उनका आरोप है कि यह अस्पताल लंबे समय से मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहा है और पूर्व में भी कई गर्भवतियों व प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
हंगामे की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने परिजनों को मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
घटना के बाद जिले में संचालित निजी नर्सिंग होमों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आवश्यक मानकों के संचालन कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
उधर, स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद ऐसे अस्पतालों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से लापरवाही का सिलसिला जारी है। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, अस्पताल को सील करने तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
सीएमओ बोले
“अस्पताल में प्रसूता की मौत का मामला संज्ञान में आया है। जांच कराई जा रही है कि अस्पताल विधिवत पंजीकृत है या नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।”
विकास कुमार शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बदायूं
उठ रहे अहम सवाल

क्या अस्पताल में प्रसव के लिए आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध थे?

गंभीर हालत होने पर प्रसूता को समय रहते रेफर क्यों नहीं किया गया?

अस्पताल निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहा था या नहीं?

स्वास्थ्य विभाग ने पूर्व शिकायतों पर क्या कार्रवाई की?जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?

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