बलिया।”वन विहार में गूंजा राष्ट्रभाव का स्वर: RSS के शताब्दी वर्ष पर नगरा में सैकड़ों स्वयंसेवकों का समागम”

“वन विहार में गूंजा राष्ट्रभाव का स्वर: RSS के शताब्दी वर्ष पर नगरा में सैकड़ों स्वयंसेवकों का समागम”

अमर बहादुर सिंह 

नगरा (बलिया)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नगरा खंड द्वारा श्री बजरंगबली इंटर कॉलेज, ताड़ीबड़ा गांव में वन विहार कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में बाल एवं तरुण स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सामाजिक समरसता का परिचय दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ भारती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर खंड संघचालक श्री ललन जी, जिला प्रचारक श्री सूर्य प्रभात जी तथा जिला कार्यवाह श्री सतीश जी मंचासीन रहे।

मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता श्री सतीश जी ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के 100 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर चुका है। उन्होंने कहा कि संघ के निरंतर प्रयासों से आज हिंदू समाज समरसता और संगठन की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि समाज की इसी एकजुटता के परिणामस्वरूप मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण संभव हुआ, जो आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने व्यायाम, विभिन्न खेलों और बौद्धिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के जयघोष से पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया। परम पवित्र भगवा ध्वज के समक्ष संघ प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

समापन के बाद सभी स्वयंसेवकों एवं अतिथियों ने समरसता सहभोज में सहभागिता की। वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मुख्य अतिथि द्वारा पौधरोपण भी किया गया।

इस अवसर पर खंड कार्यवाह श्री बृजेश जी, खंड प्रचारक डॉ. गगन जी, सह खंड कार्यवाह श्री मनोज जी, शारीरिक शिक्षण प्रमुख श्री रजनीश जी, श्री लाल बहादुर जी, श्री प्रेम प्रकाश जी, श्री बबलू सागर जी, श्री सुरेंद्र जी, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष श्री राजीव सिंह चंदेल सहित विचार परिवार के अनेक पदाधिकारी एवं सैकड़ों स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम ने संगठन, राष्ट्र सेवा, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देते हुए शताब्दी वर्ष के उत्सव को यादगार बना दिया।

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