शिक्षा के महायज्ञ में स्वामी चिन्मयानंद ने दी एतिहासिक आहुति विश्विद्यालय को दान कर दी 222 करोड़ की संपत्ति
युवाओं के हाथों में तमंचा नहीं कलम देखना चाहता हूं ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का प्रेरणा केंद्र बने : चिन्मयानंद
मुजीब खान
शाहजहांपुर : मुमुक्ष आश्रम के अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती द्वारा अपने आश्रम की 222 करोड़ की भू सम्पत्ति को आज स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय को दान में दी गई इस दौरान उन्होंने कहा कि हम युवाओं के हाथों में तमंचा नहीं कलम देखना चाहते है वह अपना भविष्य कलम से बनाए इसके लिए शिक्षा को आवश्यकता है उन्होंने अपने पूरे जीवन जनपद की शिक्षा को नए नए आयाम देने का प्रयास किया जिसका जीता जागता उदाहरण एक छोटे से कालेज को विश्वविद्यालय तक पहुंचाया जाना है ।
जनपद के शैक्षिक और आध्यात्मिक इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित हो गया, जब मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने आश्रम की लगभग 222 करोड़ रुपये मूल्य की भूसंपत्तियाँ स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के नाम दान कर दीं। यह ऐतिहासिक दान केवल संपत्ति का हस्तांतरण नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के महान संकल्प का समर्पण है। 27 मई को अपराह्न स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती रजिस्ट्री कार्यालय पहुँचे, जहाँ उनके साथ क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी बरेली प्रो. सुधीर चौहान, विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य, एसएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा तथा एसएसएमवी के सचिव अशोक अग्रवाल भी उपस्थित रहे। सब रजिस्ट्रार धर्मेन्द्र कुमार सिंह के समक्ष विधिवत दान पत्र अभिलेख पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए।
मुमुक्षु आश्रम की ओर से स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती तथा महामहिम राज्यपाल की ओर से क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो. सुधीर चौहान ने दान पत्र अभिलेख पर हस्ताक्षर किए। वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य तथा एसएस कॉलेज एवं एसएस लॉ कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा ने गवाह के रूप में अपने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर अशोक सिंह, सुयश सिन्हा, रविशंकर बाजपेयी और रामनिवास गुप्ता उपस्थित रहे। दान पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद मीडिया से वार्ता करते हुए स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने भावुक स्वर में कहा कि लगभग छह दशक पूर्व पूज्य स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज ने जिस शिक्षण–साधना का स्वप्न देखा था, वह आज एक संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से मूर्त रूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि जब वे वर्ष 1989 में शाहजहांपुर आए थे, तब यहाँ के विद्यालयों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी, किन्तु संकल्प, सेवा और संस्कार के बल पर धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में नवजागरण का कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने बताया कि जनपद का पहला सीबीएसई अंग्रेजी माध्यम विद्यालय ‘श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ’ स्थापित किया गया, एसएस कॉलेज में 14 विषयों में परास्नातक कक्षाएँ प्रारंभ कराई गईं तथा विधि शिक्षा के लिए एसएस लॉ कॉलेज की स्थापना की गई।
स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय को शाहजहांपुर की जनता को समर्पित करते हुए उन्हें आत्मिक संतोष और प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि यह विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा, शोध, संस्कार और मानवता के क्षेत्र में नित नए आयाम स्थापित करे तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का प्रेरणा केंद्र बने।
























