लखनऊ।पंचतत्व में विलीन हुए अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने दी मुखाग्नि

पंचतत्व में विलीन हुए अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने दी मुखाग्नि

अंतिम संस्कार में मौजूद रहे अखिलेश शिवपाल सहित पूरा परिवार डिप्टी सीएम बृजेश पाठक भी रहे मौजूद 

लखनऊ के भैंसा कुंड शमशान घाट पर अंतिम संस्कार पत्नी अर्पणा संग मौजूद रही प्रतीक की दोनों बेटियां

मुजीब खान

लखनऊ । आज दोपहर करीब 12 बजे अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार लखनऊ के भैंसाकुंड शमशान घाट पर किया पूरे परिवार के मौजूद होने के बावजूद भी प्रतीक को मुखाग्नि उनके ससुर अरविंद सिंह विष्ट ने दी जब हिंदू धर्म के अनुसार ससुर को मुखाग्नि देने का कोई अधिकारी नहीं है। अंतिम संस्कार के समय प्रदेश सरकार म डिप्टी सीएम बृजेश पाठक सहित बीजेपी के कई बड़े नेताओं के अलावा मुलायम सिंह परिवार के अखिलेश यादव शिवपाल यादव सहित सभी परिजन मौजूद रहे अंतिम संस्कार से पूर्व सभी परिजनों ने प्रतीक के अंतिम दर्शन इस दौरान प्रतीक यादव की पत्नी अर्पणा सिंह विष्ट भी अपनी दोनों बेटियों के साथ मौजूद रही। अंतिम संस्कार के दौरान अखिलेश ने भाई की चिता पर लकड़ी रखी और अंतिम प्रणाम किया। प्रतीक की दोनों बेटियां भी श्मशान घाट पर मौजूद थीं। दोनों ने भी पिता की चिता पर लकड़ी रखी। हालांकि, अंतिम संस्कार कराने वाले पंडित ध्रुव कुमार तिवारी ने कहा था- अगर अखिलेश यादव या उनके बेटे से मुखाग्नि दिलाई जाए तो ज्यादा अच्छा होगा।

आज सुबह 10 बजे प्रतीक की अंतिम यात्रा निकाली गई। हजारों समर्थक साथ-साथ चले और ‘प्रतीक यादव अमर रहें’ के नारे लगाए। शिवपाल के बेटे आदित्य ने शव को कंधा दिया। प्रतीक के घर से कुछ दूरी पर ही सपा कार्यालय है। शव को कुछ देर के लिए वहां जमीन पर रखा गया। परंपरा के अनुसार, श्मशान घाट पहुंचने से पहले शव को पांच बार जमीन पर रखा जाता है। प्रतीक एनिमल लवर थे। शव वाहन पर उनकी डॉग्स और बंदर के साथ वाली तस्वीर लगाई गई। सुबह शव को अंतिम दर्शन के लिए घर में रखा गया। दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने प्रतीक को श्रद्धांजलि दी। शिवपाल और डिंपल यादव ने भी अंतिम दर्शन किए।

आपको बताते चले कि प्रतीक यादव का बुधवार सुबह 6 बजे 38 साल की उम्र में निधन हुआ था। प्रतीक, मुलायम यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। पत्नी अपर्णा भाजपा नेता हैं। इस वक्त राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। श्मशान घाट पर अखिलेश-शिवपाल के अगल-बगल प्रतीक की दोनों बेटियां प्रथमा और पद्मजा बैठीं। सपा प्रमुख के बेटे अर्जुन उनके पीछे बैठे। दो कुर्सी छोड़कर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी बैठे थे। श्मशान घाट पर अखिलेश-शिवपाल के अगल-बगल प्रतीक की दोनों बेटियां प्रथमा और पद्मजा बैठीं। सपा प्रमुख के बेटे अर्जुन उनके पीछे बैठे। दो कुर्सी छोड़कर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी बैठे थे।अखिलेश यादव करीब आधे घंटे तक अपने बेटे अर्जुन यादव, चाचा शिवपाल यादव सहित परिवार के कई लोगों के साथ श्मशान घाट पर मौजूद रहे। उसके बाद प्रतीक की दोनों बेटियों को साथ लेकर घर की ओर निकल गए। सिर्फ धर्मेंद्र यादव अब भी श्मशान घाट पर रुके हुए हैं।

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा बोले- प्रतीक यादव की मौत संदिग्ध, हाईकोर्ट के पूर्व जज जांच करें

समाजवादी पार्टी नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा, पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की आज आकस्मिक और असमायिक मृत्यु हो गई। इससे हम लोग बहुत आहत हैं। जब प्रतीक यादव को अस्पताल में लाया गया था, उससे पहले ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें देख कर मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत संदिग्ध अवस्था में हुई। उनके शरीर पर चोट के निशान थे और उनके शरीर में जहर की मात्रा थी। इसलिए उनका पोस्टमार्टम करवाया गया। किसी सामान्य मृत्यु पर पोस्टमार्टम नहीं होता है। संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के कारण उनका पोस्टमार्टम करवाया गया। हमने मांग की है कि उनके मौत के कारणों की जांच करवाई जाए, उनकी मौत सामान्य नहीं है। हम लोगों ने मांग की है कि हाई कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश से प्रतीक यादव की मौत की जांच करवाई जाए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उलझाई प्रतीक की मौत की गुत्थी फेफड़ों में जमा मिला खून शरीर पर मिली 6 चोटें

प्रतीक यादव की मौत के बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कई सवालों को जन्म दिया है उनके फेफड़ों में खून के थक्के जमा होने के साथ शरीर पर 6 चोटों निशान भी मिले जिनमें तीन चोटे चार दिन पुरानी और दो चोटें 1 दिन पुरानी बताई गई है। रिपोर्ट में मौत की वजह फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज बताई जा रही है, जिससे हार्ट और सांस लेने की प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया था। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात शरीर पर मिलीं 6 अनसुलझी चोटें हैं, जिन्होंने जांच की दिशा में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल इन चोटों के पीछे का असल कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक फाइनल फोरेंसिक और केमिकल रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इन जख्मों के बारे में कुछ भी बता पाना मुश्किल है। इसकी बारीकी से जांच करने के लिए सैंपल ‘फॉर्मेलिन’ में सुरक्षित रख लिए गए हैं। इसके अलावा, विसरा के नमूने भी लैब भेजे गए हैं, ताकि किसी भी तरह के जहर या बाहरी केमिकल के प्रभाव की संभावना का पूरी तरह पता लगाया जा सके। एक्सपर्ट्स अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह थक्का नेचुरल था या इसके पीछे कोई बाहरी कारण हो सकता है। बीमारी की बात सामने आई है, लेकिन शरीर पर मिले चोट के निशानों ने मामले को संदिग्ध बना दिया है। अब विसरा रिपोर्ट और अन्य लैब टेस्ट का इंतजार है, जिससे यह साफ हो पाएगा कि यह केवल एक प्राकृतिक मौत है या इसके पीछे कोई और बड़ी वजह है।

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