Monday, February 16

बलिया।शारदा कार्यक्रम के अंतर्गत गैर प्रवेशित/नामांकित बच्चों को शिक्षित किए जाने हेतु आयोजित किया गया आउट ऑफ स्कूल का प्रशिक्षण प्रशिक्षण।

शारदा कार्यक्रम के अंतर्गत गैर प्रवेशित/नामांकित बच्चों को शिक्षित किए जाने हेतु आयोजित किया गया आउट ऑफ स्कूल का प्रशिक्षण प्रशिक्षण।

 संजीव सिंह बलिया।देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। नेहा शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के निर्देशानुसार 6 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे बच्चे जो कभी विद्यालय नहीं गए अथवा जो अपनी प्रारंभिक शिक्षा को पूर्ण नहीं कर पाए हैं उन्हें उनकी उम्र के सापेक्ष उपयुक्त कक्षा में प्रवेश दिलाते हुए शिक्षित किए जाने हेतु शारदा कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण का आयोजन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पकवाइनार बलिया पर आयोजित किया गया। संस्थान के प्राचार्य /उप शिक्षा निदेशक मनीष कुमार सिंह द्वारा बताया गया कि ऐसे बच्चों को संबंधित कक्षा के स्तर पर लाने के लिए नि:शुल्क विशेष अध्ययन प्राप्त करने का अधिकार है।14 वर्ष की आयु हो जाने के बाद भी बच्चे का अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने का अधिकार संरक्षित किया गया है। उक्त के परिप्रेक्ष्य में डाइट पर आयोजित प्रशिक्षण में जनपद के सभी शिक्षा क्षेत्र के एकेडमिक रिसोर्स पर्सन/ की रिसोर्स पर्सन का तीन दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया जिसमें आउट ऑफ स्कूल बच्चों को विभिन्न विषयों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु समझ विकसित की गई। प्रशिक्षण के नोडल तथा मनोविज्ञान विषय के प्रवक्ता देवेंद्र कुमार सिंह द्वारा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए बच्चों के सार्वभौमिक विकास हेतु सुझाव प्रस्तुत किया गया साथ ही प्रवक्ता जानू राम द्वारा बच्चों को समाज के संसाधन के रूप में स्वीकार करने की तथा उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु हर दिन स्कूल आएं के क्रम को संगठित पाठ्यक्रम के आधार पर विकसित पठन सामग्री में पाठ्य पुस्तक, कार्यपुस्तिका एवं शिक्षण अधिगम सामग्री के समावेश की बात की गई जिसमें यह बच्चों के लिए रुचि पूर्ण तथा सहज रूप से प्रदान की जा सके। उपरोक्त क्रियाकलापों के परिप्रेक्ष्य में विशेष प्रशिक्षण हेतु विभिन्न शिक्षा क्षेत्र से आए हुए प्रशिक्षणार्थियों को अंग्रेजी विषय की महत्ता बताते हुए पूर्व एकेडमिक पर्सन डॉक्टर शशि भूषण मिश्र द्वारा बताया गया कि आदतों का निर्माण तथा भाषा का विकास साथ-साथ चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें हमें आउट ऑफ स्कूल के बच्चों को विशेष लगाव उत्पन्न किए जाने की आवश्यकता है, जिससे बच्चे बिना किसी रूकावट के सीखने के क्रम को जारी रख सकें तथा समाज एवं राष्ट्र की प्रगति में उनकी भूमिका को यथा स्थान दिलाया जा सके।

डॉ मिश्र द्वारा बताया गया कि हमारे परिवेश में अंग्रेजी विषय की शिक्षा हमेशा से महत्वपूर्ण स्थान रखती आई है तथा वर्तमान ग्लोबल दुनिया में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। विभिन्न विधियों तथा उपागम की चर्चा करते हुए स्पष्ट किया गया कि भाषा विज्ञान समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और ऐसे बच्चे जो गैर नामांकित हैं या अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं उनके लिए अंग्रेजी भाषा की शिक्षा को प्रदान करना एक चुनौती भरा कार्य हैं लेकिन इस प्रशिक्षण के उपरांत शिक्षक बच्चों को रोचक तरीके से भाषाई कौशलों का प्रयोग करते हुए हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी को भी सीखाने में सफल हो सकेंगे। प्रशिक्षण के सकुशल संपन्न होने पर जिला समन्वयक सौरभ गुप्ता द्वारा सभी के प्रति आभार व्यक्त किया गया। प्रशिक्षण में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के समस्त प्रवक्ता गण अविनाश कुमार, सिंह डॉक्टर मृत्युंजय सिंह, डॉ जितेंद्र गुप्ता, राम प्रकाश, डॉक्टर अशफाक ,हलचल चौधरी, किरण सिंह तथा डॉक्टर शाइस्ता अंजुम द्वारा अपना योगदान प्रस्तुत किया गया।

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