लखनऊ।16 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया समाप्त, 14 साल पुराने मामले भी निपटाए गए

16 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया समाप्त, 14 साल पुराने मामले भी निपटाए गए

छह जनपदों के गांव धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से पृथक, आजमगढ़ व मीरजापुर में वर्षों पुरानी चकबंदी पूरी

लखनऊ। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में लंबे समय से लंबित चकबंदी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा कराने की कवायद तेज कर दी गई है। इसी क्रम में चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने विभिन्न कारणों से लंबे समय से अटकी चकबंदी प्रक्रियाओं को समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।

निर्देशों के तहत छह जनपदों के 16 गांवों को जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के अंतर्गत चकबंदी प्रक्रिया से पृथक किया गया है। इनमें बदायूं के पिण्डौल और बेहटा गुसाई गांव शामिल हैं, जहां चकबंदी प्रक्रिया पिछले 14 वर्षों से चल रही थी।

इसी तरह संभल के मैथरा आलपुर, सादातबाड़ी, लहरावन और बिसारू, बांदा के हटेटीपुरवा, उन्नाव के चकरसूलपुर, मुण्डा और नाजिरपुर, चित्रकूट के पहाड़ी बुजुर्ग, नहरा और अर्की, बांदा के रामनगर निस्फ तथा अमरोहा के सिरसा गूजर ऐ. और सतेडा ऐ. गांवों को भी धारा-6(1) के तहत प्रक्रिया से पृथक किया गया है।

34 साल पुरानी चकबंदी भी पूरी

वहीं, आजमगढ़ के ग्राम कुंजी में 34 वर्षों से और मीरजापुर के ग्राम बबुरा कला में 12 वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया को नियमित अनुश्रवण के बाद जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत पूर्ण कर दिया गया है।

चकबंदी आयुक्त ने प्रारंभिक चकबंदी प्रक्रिया के दौरान गाटों में चकबंदी से पृथक भू-भाग के स्वत्व का समुचित विनिश्चय करने तथा जोत चकबंदी अधिनियम एवं मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार गाटों का विनिमय अनुपात निर्धारित करने के निर्देश सभी चकबंदी प्राधिकारियों को दिए हैं।

सरकार का उद्देश्य लंबित चकबंदी प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से निपटाकर किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ सुगमता से उपलब्ध कराना है।

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