आजमगढ़।गरीब छात्र छात्राओं को तराश कर नई पहचान देने में जुटा एक शिक्षक, प्रतियोगी परीक्षाओं की करा रहे हैं निशुल्क कोचिंग 

गरीब छात्र छात्राओं को तराश कर नई पहचान देने में जुटा एक शिक्षक, प्रतियोगी परीक्षाओं की करा रहे हैं निशुल्क कोचिंग 

आजमगढ़। वर्तमान समय में प्राचीन गुरुकुल गुरु- शिष्य परंपरा का निःशुल्क शिक्षा रूपी दान दिया जाना अपने आप एक मिशाल है। इसका जीवंत उदाहरण शिक्षक राजभवन राम है। राजभवन राम मूलतः तहबरपुर विकास खण्ड में पड़ने वाले करियाबर गांव के निवासी हैं। जो तहबरपुर शिक्षा क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय गोबिन्दपुर में प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। आज के भागम भाग के दौर में जब किसी को एक छड़ की फुर्सत नहीं है।लोग छुटि्टयों के समय में अपना निजी काम काज निपटाने में लगे हैं।या फिर और कार्य कर रहे हैं।ऐसे में वे गांव जवार के नव निहालों को पंखों में जान भर रहे हैं। उनके अंदर ज्ञान का दीप जला रहे हैं। राजभवन राम छुट्टी के बाद स्कूल में और रविवार सहित अन्य अवकाश के दिनों में अपने करियावर स्थित आवास पर राष्ट्रीय आय योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा तथा नवोदय प्रतियोगिता परीक्षाओ की निःशुल्क तैयारी करवा रहे हैं। इतना ही नहीं अपने अलावा अन्य शिक्षकों को बुलाकर पढवाते है। और साथ ही समय समय पर प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रैक्टिस भी करवाते हैं।अब तक इनके पढ़ायें दर्जनों छात्र छात्राएं राष्ट्रीय आय योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षाएं उत्तीर्ण कर चुके हैं। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा का आवेदन कक्षा आठवीं उत्तीर्ण छात्र छात्राएं करते हैं। परीक्षा में उत्तीर्ण इन छात्र छात्राओं को सरकार द्वारा पढ़ाई में धन आड़े न आये इसके लिए नववीं से बारहवीं कक्षा तक 1000 रुपए छात्र वृत्ति प्रदान करती है। गांव के गरीब मजदूर जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वे अपने बच्चों को कोचिंग का फीस नहीं दे सकते हैं। ऐसे में उनके लिए बरदान साबित हो रहा है। राज भवन राम ने बताया कि इससे मुझे बहुत ही सकून मिलता है। तहबरपुर के खण्ड शिक्षा अधिकारी व्यास देव ने सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्राचीन गुरुकुल गुरु – शिष्य परम्परा का निःशुल्क शिक्षा रुपी ज्ञान का दान दिया जाना बेहतरीन उदाहरण है।

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