विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विद्यालय ने लिया एकता-पर्यावरण का संकल्प; 21-21 पौधे रोपे गए
संजीव सिंह बलिया। शिक्षा क्षेत्र रसड़ा के कोप ग्राम के उच्च प्राथमिक विद्यालय में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर इको क्लब के बलिया प्रभारी पर पर्यावरणविद शैलेन्द्र प्रताप यादव द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम ने आज विद्यालय और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह व संवेदनशीलता की लहर दौड़ा दी। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त दर्शनशास्त्री डॉ. विद्यासागर उपाध्याय और समाज-चिंतक प्राथमिक शिक्षक संघ नगरा के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप यादव ने विभाजन के दुखद पहलुओं तथा उस दौर की जटिल सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को गहराई से समझाया, जिससे श्रोताओं में इतिहास के प्रति गंभीरता और सहानुभूति बनी।
बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार ने कहा कि शिक्षा में पर्यावरण संरक्षण, खेल और संस्कार का समन्वय बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य है। खंड शिक्षा अधिकारी पवन कुमार सिंह ने विद्यालय को केवल ज्ञान का केंद्र न मानते हुए बताया कि यह समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने और संस्कार देने का माध्यम भी है। उन्होंने यह भी कहा कि हराभरा, स्वच्छ और सौंदर्यपूर्ण विद्यालय निरीक्षण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं और वहां का वातावरण उत्साहवर्धक होता है।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रत्येक भाग लेने वाले विद्यालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना और लगभग प्रत्येक स्कूल में 21-21 पौधे रोपना रहा। आयोजक शिक्षक शैलेन्द्र प्रताप ने बताया कि उनके विद्यालय के साथ-साथ आसपास के कई ग्रामों के विद्यालयों ने भी इस पहल को अपनाया है और इसे पूरे महीने निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया है।
कार्यक्रम की सफलता में स्कूल परिवार, शिक्षकों और अनेक स्थानीय गणमान्यों ने सक्रिय योगदान दिया। प्रमुख सहयोगियों में बलवंत सिंह, उदय नारायण, गणेश यादव, उमेश कुमार, संतोष कुमार गोयल, संजय कुमार चौहान, बृजेश यादव, सियातुल्लाह अंसारी, अनुरानी, लक्ष्मी यादव, रोशन, अजय सिंह, धर्मेंद्र सिंह, सुजीत सिंह, संतोष वर्मा, राजेश यादव और शैलेंद्र सिंह जैसे लोगों का नाम उल्लेखनीय रहा।
आयोजक ने सभी अतिथियों, सहयोगियों, शिक्षक साथियों, बच्चों और ग्रामीण नागरिकों का हृदयपूर्वक आभार व्यक्त किया और कहा कि यह आयोजन इतिहास की समझ, संस्कार, खेल तथा पर्यावरण चेतना को जोड़ने की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल न केवल इस विद्यालय तक सीमित रहेगी बल्कि पूरे प्रदेश के विद्यालयों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
आखिर में आयोजक ने कहा—“हमारा संकल्प है कि विद्यालय ज्ञान का केंद्र बने, संस्कार का केंद्र बने और प्रकृति संरक्षण का भी केंद्र बने।” विभाजन की स्मृतियों से मिली सीख ने आज एकता व हरित भविष्य के प्रति दृढ़ संकल्प को और मजबूत किया।
























