पांच दशक से झोपड़ी में जीवन, नगर पंचायत के पास बासफोर परिवारों को पक्की छत का इंतजार
आचार्य ओमप्रकाश वर्मा। नगरा /बलिया
नगर पंचायत नगरा के विद्युत उपकेंद्र के समीप बासफोर समुदाय के कई परिवार पिछले करीब पचास वर्षों से झुग्गी-झोपड़ी में जीवन यापन करने पर मजबूर हैं। समय के साथ सरकारें बदलीं और विकास के दावे भी सुनने को मिले, लेकिन इन परिवारों की दशा आज भी जस की तस बनी हुई है। इन परिवारों के पास न पक्की छत है न स्थिर आवास; बरसात, गर्मी व सर्दी में उन्हें हर बार जोखिम भरे हालात का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह परिवार दशकों से उसी स्थान पर रहते आ रहे हैं, फिर भी प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य लाभकारी योजनाओं का लाभ इन्हें अभी तक नहीं मिल पाया। झोपड़ियों में पानी घुसना, आग का खतरा और सुरक्षा का अभाव उनकी रोजमर्रा की चिंता बनी रहती है। बावजूद इसके नगर पंचायत और संबंधित अधिकारियों की ओर से इनकी समस्या पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि पात्र परिवारों का सर्वे कराकर उन्हें योजनाओं के अनुसार आवास और अन्य सुविधाएँ प्रदान की जाएँ तो इनके जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है। यहाँ रहने वाले ज्यादातर परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं — कन्हैया लाल, गुलाबी देवी, धर्मू, बबलू, जद्दू, आकाश बासफोर, लाल बाबू, टिघुरी देवी, गुड़िया, उषा, प्रीति, मीरा, सुनील तथा विनोद बासफोर प्रमुख नाम हैं जो इस पीड़ा की जीवंत मिसाल हैं।
बासफोर समाज के प्रतिनिधियों ने नगर पंचायत एवं जिला प्रशासन से अपील की है कि वे स्थलीय सत्यापन कराकर इन परिवारों की वास्तविक स्थिति का आकलन करें और पात्रता मिलने पर उन्हें शीघ्र आवास उपलब्ध कराया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास तभी सार्थक होगा जब समाज के सबसे कमजोर तबके के सिर पर भी सुरक्षित छत होगी।
नगर पंचायत के अधिकारी इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे। हम प्रशासन से उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय समाजसेवी और विकास कार्यकर्ता भी मामले को उठाने और स्थायी समाधान दिलाने के लिए तैयार हैं।
























