श्री बल्देव धाम बालाजी दरबार में निर्धन कन्या विवाह सम्पन्न, पूज्य गुरुदेव ने भावुक होकर की बिटिया की विदाई
(आशुतोष शर्मा)बदायूं। जनपद के बिल्सी तहसील क्षेत्र के ग्राम गुधनी खौंसारा स्थित प्राचीन श्री बल्देव धाम बालाजी दरबार में मंगलवार रात एक निर्धन कन्या का विवाह हुआ। धाम के सभी सेवादार और बाबा के भक्तों ने श्रद्धा, भक्ति और भावुक वातावरण के बीच धूमधाम से विवाह संपन्न कराया। इस पूर्ण कार्य का संकल्प पीठाधीश्वर श्री ललितेश्वरानंद जी महाराज ने लिया था। गुरुदेव ने स्वयं कन्या के पिता की भूमिका निभाते हुए विवाह की समस्त जिम्मेदारियां निभाईं और त्याग समर्पण और करुणा की अनूठी मिसाल पेश की। इस अवसर पर धाम से जुड़े सभी भक्तों ने नव दंपति को शुभकामनाएं दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री बल्देव धाम परिसर में पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में कई दिनों से विवाह की तैयारियां चल रही थी। कई दिनों से विवाह की रस्मों को निभाया जा रहा था। मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और मंगल गीतों के बीच विवाह समारोह संपन्न हुआ। हजारों की संख्या में बाबा के भक्ति इस विवाह समारोह में सम्मिलित होने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए इसे धर्म और मानवता का श्रेष्ठ उदाहरण बताया।
पूज्य श्री ललितेश्वरानंद जी महाराज ने कन्या के पिता बनकर स्वागत से लेकर कन्यादान, आशीर्वाद और विदाई तक हर कर्तव्य पूरी श्रद्धा और आत्मीयता के साथ निभाया। उपस्थित लोगों ने कहा कि गुरुजी के व्यवहार में एक पिता का वात्सल्य स्पष्ट दिखाई दे रहा था। गुरुदेव समर्पण प्रेम और करुणा का जीता जागता उदाहरण है।
विवाह रस्मों और रीति रिवाजों में पूज्य गुरु माता का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। श्री गुरुदेव महाराज पिता और गुरु माता ने मां बनकर विवाह की तैयारियों, श्रृंगार, विभिन्न रस्में निभाई। विदाई तक वह कन्या के साथ ममता और स्नेह से जुड़ी रहीं। महिलाओं ने गुरु माता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक मां का कर्तव्य निभाकर सेवा, संस्कार और करुणा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है।
विदाई का क्षण पूरे समारोह का सबसे भावुक पल रहा। जब कन्या की विदाई हुई तो श्री ललितेश्वरानंद जी महाराज की आंखें नम हो गईं। पुत्री को विदा करते समय उनकी भावनाएं देखकर उपस्थित श्रद्धालु भी भावुक हो उठे।
श्री बल्देव धाम में आयोजित इस विवाह उत्सव ने यह संदेश दिया कि ऐसे संत जरूरतमंद बेटियों के जीवन को संवारने के लिए माता-पिता बनकर आगे आते हैं। श्रद्धालुओं ने श्री ललितेश्वरानंद महाराज एवं गुरु माता के इस महान सेवा कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस पावन मौके पर हजारों की संख्या में आसपास जिलों के अलावा अन्य प्रदेशों से बाबा के भक्तों ने उपस्थित होकर नव दंपति को आशीर्वाद दिया।
























