पीएम मोदी के सोना न खरीदने की अपील पर बीजेपी विधायक ने कसा तंज बिना मंगलसूत्र कैसे होगा विवाह
विधायक के तंज से मचा सियासी तूफान फेसबुक वाल से हटानी पड़ी विधायक को अपनी पोस्ट
मुजीब खान
हरदोई : भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के बयानों को तबज्जों देते हुए उसे बढ़िया से बढ़िया ढंग से जनता के बीच पेश करने का सत्ता पक्ष के विधायकों और सांसदों सहित अन्य लोगों को निर्देश दिए जाते है ताकि अन्य विपक्षी दल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के द्वारा दिए गए बयान या अपील को जनता के बीच भ्रामक न बना दे लेकिन अगर सत्ता पक्ष का विधायक ही प्रधानमंत्री की अपील पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर वायरल करे तो क्या होगा ? लेकिन ऐसा हुआ है उत्तर प्रदेश के जनपद हरदोई में जहां सत्तापक्ष के विधायक श्यामलाल प्रकाश
ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना न खरीदने की अपील पर टिप्पणी करते हुए हिंदू शादियों में मंगलसूत्र और गहनों की अहमियत का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पर सवाल उठाया, जिसके बाद उनका पोस्ट वायरल हो गया जिससे अचानक प्रदेश का सियासी पारा अचानक बढ़ गया बाद में प्रेशर के कारण उन्हें अपनी पोस्ट हटानी पड़ी लेकिन तब तक पोस्ट जंगल में आग की तरह फैल चुकी थी।
हरदोई की गोपामऊ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदू समाज में बिना मंगलसूत्र और सोने के गहनों के शादी कैसे संभव होगी। उन्होंने अपने बेटे की आगामी शादी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें चिंता है कि बिना सोने के गहनों के रिश्ते में परेशानी खड़ी हो सकती है और शादी प्रभावित हो सकती है। श्याम प्रकाश ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि कोई भक्त यह भी बता दे कि बिना मंगलसूत्र और सोने के गहनों के हिंदू विवाह कैसे होंगे। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि उनके बेटे की शादी दिसंबर में है और ऐसी स्थिति में बिना गहनों के रिश्ते टूटने का खतरा बना रहेगा। विधायक ने आगे यह भी लिखा कि यदि वास्तव में एक साल तक सोना खरीदना बंद करना है, तो फिर एक साल तक शादियां ही रोक देनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के दूसरे आह्वान का जिक्र करते हुए कहा कि वह इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर भी विचार कर रहे हैं। पोस्ट वायरल होने के बाद मामला तेजी से गरमाने लगा और विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बना लिया।
विधायक का पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई लोगों ने इसे प्रधानमंत्री की अपील का विरोध बताया, तो कुछ ने इसे व्यंग्यात्मक टिप्पणी करार दिया। मामला बढ़ता देख विधायक ने बाद में अपना पोस्ट डिलीट कर दिया। हालांकि तब तक पोस्ट के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर फैल चुके थे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा के भीतर से इस तरह की प्रतिक्रिया सामने आना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। वहीं विपक्ष ने इसे लेकर भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
























