मानव कल्याण के लिए आवश्यक है यज्ञ
आजमगढ़। जनपद के तहबरपुर विकास खण्ड में पड़ने वाले ग्राम सराय सागर में 18 मई से होने वाली श्री शत चंडी महायज्ञ की तैयारी जोरों चल रही है।यज्ञ को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
श्री श्री योगी रामानंद दास जी महाराज ने बताया कि अनादि काल से वैदिक ऋषि कालीन समय से यज्ञनारायण भगवान की महिमा का गायन वेदों में किया गया है । यज्ञ का उद्देश्य ऋचाओं के माध्यम से परमात्मा की उपासना करना है। आज हमारा समग्र मानव समाज अत्याधुनिक हथियारों के कारण से विनाश की कगार पर है । अगर महापुरुषों के उपदेशों को नहीं माना तो हमारा पूर्व समग्र मानव जाति का विनाश हो जाएगा । सनातन की पावन परंपरा समग्र जीव जंतु पेड़ – पौधे पर्यावरण जल जीवन जानवर विधि प्रपंच की रक्षा करने के लिए वेदों के माध्यम से प्रेरणा प्राप्त होती है । इसलिए मध्यकालीन संतों से लेकर 19 में 20 वीं शताब्दी में होने वाले महापुरुषों ने सदा सर्वदा उपनिषद वेद वेदांतों पर जोर दिया । वेदांत मानव गरिमा का उद्घोषक एवं परिप्रष्ट पोशाक है ।क्योंकि सनातन संस्कृति वेदिक संस्कृति यज्ञ की संस्कृति जीओ और जीने का उपदेश देता है ।और परस्पर की प्रेम की कल्याण की सद्भावना के लिए हमारे वैदिक वन में यज्ञ नारायण भगवान की महिमा का प्रतिपादन किया गया है। हथियारों से पर्यावरण प्रदूषण होता है । यज्ञ से पर्यावरण शुद्ध होता है।जब वातावरण शुद्ध होता है तो अच्छी वर्षा होती है। अच्छी वर्षा होती है तो अच्छी फसल होती है तो लोग खुशहाल होता है। श्री श्री योगी रामानंद जी महाराज ने अपील किया कि हमारा जीवन यज्ञ दान हो तब से परस्पर सहयोग की भावना से चलता है ।
इस अवसर पर विनोद उपाध्याय , दीनदयाल उपाध्याय , राकेश उपाध्याय , महेंद्र विश्वकर्मा , छोटू , आचार्य मधुसूदन , अजय राय , प्रेम प्रकाश राय , प्रेम शंकर राय, रविंद्र राय , निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य शिव मूरत यादव , प्रदीप राय , विवेक राय जर कृष्ण मोहन उपाध्याय आदि मौजूद रहे।























