बरेली : जिला अस्पताल में न मिला इलाज न मिली एम्बुलेंस ठेले पर मरीज ले गया बुजुर्ग वीडियो वायरल 

बरेली : जिला अस्पताल में न मिला इलाज न मिली एम्बुलेंस ठेले पर मरीज ले गया बुजुर्ग वीडियो वायरल 

डीएम ने बैठाई जांच डिप्टी सीएम बृजेश पाठक तक पहुंचा मामला स्वास्थ्य महकमे में हड़म्कप 

मुजीब खान

बरेली : उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री से लेकर सभी मंत्री और विधायक स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने के जो बड़े बड़े दावे कर रहे उसकी पोल उस समय बरेली में खुली जब एक बुजुर्ग महिला को जिला अस्पताल में इलाज नहीं मिला तो वह उसे घर ले जाने की लिए एम्बुलेंस की डिमांड करता है लेकिन एंबुलेंस भी उसे उपलब्ध नहीं हो पाती तब विवश होकर वह बुजुर्ग अपनी पत्नी को एक ठेली पर लिटा कर ले जाता दिखा जिसकी किसी ने विडियो वायरल कर दी वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच आनन फानन ने डीएम ने वायरल वीडियो पर जांच बैठा दी लेकिन मामला यही नहीं रुका प्रदेश सरकार में डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने भी इस वायरल वीडियो पर संज्ञान लेते हुए जांच करके रिपोर्ट तलब कर ली है ।

बताया जा रहा है कि महिला पिछले तीन दिनों से जिला अस्पताल के फीमेल वार्ड में भर्ती थी। हालत में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया था। आरोप है कि इसी दौरान बुजुर्ग पति इलाज और व्यवस्थाओं से परेशान होकर पत्नी को ठेले पर लिटाकर अस्पताल से निकल गया। किसी कर्मचारी ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। प्रभारी एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित ने बताया कि मामले की जांच के लिए समिति बनाई गई है। जांच टीम उस समय ड्यूटी पर मौजूद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय से पूछताछ करेगी। साथ ही अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जाएगी ताकि यह साफ हो सके कि आखिर किन परिस्थितियों में बुजुर्ग को ऐसा कदम उठाना पड़ा। सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि महिला मरीज के अस्पताल छोड़कर जाने की सूचना किसी भी कर्मचारी ने वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी। अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी वायरल वीडियो के जरिए मिली। इससे अस्पताल की निगरानी व्यवस्था और कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले को गंभीर बताते हुए स्वास्थ्य महानिदेशक को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। शासन स्तर पर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। उधर मामला सुर्खियों में आने के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अचानक सफाई अभियान शुरू कर दिया गया। वार्डों की साफ-सफाई कराई गई, पंखों पर जमी धूल हटाई गई और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की कवायद तेज कर दी गई। माना जा रहा है कि अधिकारियों के संभावित निरीक्षण को देखते हुए अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ है।

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