जनसुनवाई या जनठगई? RTI और IGRS में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आजाद अधिकार सेना का अनिश्चितकालीन धरना।
उपेन्द्र कुमार पांडेय
आजमगढ़। सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार, आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर शिकायतों के फर्जी निस्तारण और सूचना का अधिकार (RTI) कानून के दम तोड़ते वजूद के खिलाफ आजाद अधिकार सेना ने चेतावनी के बाद अब मोर्चा खोल दिया है। संगठन के शीर्ष नेतृत्व के आह्वान पर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित अंबेडकर पार्क में जिलाध्यक्ष अशोक सिंह के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया। धरने में जिले की विभिन्न तहसीलों से आए पीड़ितों ने हिस्सा लिया, जो लंबे समय से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिले में जनसुनवाई अब ‘जन ठगई’ में तब्दील हो चुकी है। जिलाध्यक्ष अशोक सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी और कर्मचारी धनबल के प्रभाव में आकर कार्यालयों में बैठकर ही शिकायतों की फर्जी रिपोर्ट लगा रहे हैं। धरातल पर कोई जांच नहीं होती, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलना असंभव हो गया है। IGRS और RTI जैसे पारदर्शी कानून अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं। संगठन ने जिला प्रशासन के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं और चेतावनी दी है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, धरना समाप्त नहीं होगा। जिसमें स्वयं जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक स्वयं प्रत्येक तहसील और थाना स्तर पर कम से कम 10-10 मामलों का औचक स्थलीय निरीक्षण करें। फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। RTI के तहत सूचना देने में देरी करने या भ्रामक जानकारी देने वाले जन सूचना अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। शिकायतों की जांच उन्हीं अधिकारियों से न कराई जाए जिनके विरुद्ध शिकायत की गई है; इसके लिए निष्पक्ष एजेंसियों का सहारा लिया जाए। आजाद अधिकार सेना के इस कदम ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाता है। इस दौरान नन्दसेन सिंह, सुनील चौधरी, सुजीत दूबे, संतोष पाण्डेय, बद्री सिंह, प्रदीप त्रिपाठी, सुदर्शन, उपेंद्र सिंह, बिहारी पुजारी, प्रमोद, फूलमती, बादामी, प्रीति सरोज, सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता और पीड़ित मौजूद रहे।
























