शाहजहांपुर।परिवारिक विरोध के बाद भी बीजेपी के गढ़ में कैसे लिखा पूजा कसाना ने जीत का फसाना ? पीछे कोई विभीषण तो नहीं

परिवारिक विरोध के बाद भी बीजेपी के गढ़ में कैसे लिखा पूजा कसाना ने जीत का फसाना ? पीछे कोई विभीषण तो नहीं

पूजा के पति दानिश के सगे चाचा ने कांग्रेस से लड़ाया था अपना प्रत्याशी बड़े मत पाकर रहा तीसरे स्थान पर 

मुजीब खान

शाहजहांपुर : कल शाम कटरा नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान की मतगणना में आने वाले परिणाम सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी के लिए किसी बड़े अप्रिय समाचार से कम न थे क्योंकि इस सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश के सबसे कद्दावर मंत्री या कहे मिनी मुख्यमंत्री वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और जनपद के प्रभारी मंत्री नरेंद्र कश्यप द्वारा कमान संभाली थी सांसद अरुण सागर का गृह नगर राज्यसभा सांसद मिथलेश की कड़ी मेहनत इसके अलावा जिला अध्यक्ष के सी मिश्रा का प्रतिदिन कटरा दौरा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजय प्रताप के कैंपेनिंग के साथ आधा दर्जन सत्ता पक्ष के ब्लॉक प्रमुख सहित कटरा के वरिष्ठ से लेकर कनिष्क बीजेपी नेताओं को मशक्कत के बाद भी बीजेपी प्रत्याशी को वोट का आंकड़ा 4 हजार पार न कर पाना वाकई बीजेपी के लिए सोचनीय है ।

अब बात की जाए विजय प्राप्त करने वाली निर्दलीय प्रत्याशी पूजा कसाना की जिन्होंने बीजेपी प्रत्याशी को 401 मतों से पराजित करके नगर पंचायत अध्यक्ष पद का ताज आपने नाम किया उनके सामने तमाम मुश्किलें खड़ी थी जिनमें सबसे बड़ी मुश्किल उनके पति के सगे चाचा समी उशशान खान खड़े थे जिन्होंने अपने घर के एक नौकर को कांग्रेस से प्रत्याशी बनाकर चुनावी समर उतार दिया ऐसा नहीं कि यह सब नूरा कुश्ती हो उसने भी बकायदा पूरा चुनाव लड़ा और 3109 वोट पाकर अच्छा प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान प्राप्त किया अब सवाल यह उठता है कि पूजा कसाना के जनसंपर्क के लिए न तो कोई नेता था न अभिनेता सिर्फ अकेले ही कटरा की जनता बीच जाकर अपनी बात रखना और लोगों का दिल जीतकर अपना बनाने का प्रयास करना और इतने बड़े मुक़ाबले में जीत हासिल करना पूजा की जीत किसी फिल्मी कहानी से लगती है जिसमें बड़े बड़े नेता धराशाही हो जाते है और चुनाव जीत जाता है वह जिसका कोई अनुमान नहीं लगा सकता लेकिन यह सब फिल्मों तक ही सीमित होता है क्योंकि ऐसे चुनाव की पटकथा पर्दे के पीछे लिखी जाती है और शायद ऐसा कटरा में भी हुआ चुनाव कैंपेनिंग के दौरान बड़े सत्ता पक्ष के चेहरों को कटरा की गलियों में खाक छानते देखा गया पोलिंग से लेकर काउंटिंग तक जीत के बड़े बड़े दावे लेकिन अंत में परिणाम और कुछ ऐसा क्या हुआ जो बीजेपी प्रत्याशी चार हजार का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया क्या इसके पीछे किसी विभीषण का हाथ है इस पर बीजेपी को गहन मंथन करना चाहिए क्योंकि पूजा कसाना की जीत के बाद वह चेहरे सामने आए जो पूरे चुनाव के दौरान पर्दे के पीछे रहे लेकिन काम सामने आने से ज्यादा किया गया घरेलू विवाद और विरोध के साथ बड़ी फतह के पीछे का कारण क्या है इसके विषय में साफ तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन किसी विभीषण का साथ होने से इनकार भी नहीं किया जा सकता। खैर जो भी हो कटरा को एक राजसी खानदान का चेयरमैन मिला है जिससे उम्मीद है कि कटरा में कुछ नया देखने को अवश्य मिलेगा ।

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