बलिया के बागी शेर चंद्रशेखर जी की 99वीं जयंती: सादगी, साहस और समाजवाद का प्रतीक:रामगोविंद चौधरी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष
संजीव सिंह बलिया। भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष, ‘युवा तुर्क’ के नाम से विख्यात और समाजवाद एवं लोकतंत्र के नायक, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय चंद्रशेखर जी की 99वीं जयंती पर पूरे देश में श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। बलिया की पावन धरती से निकले इस महान समाजवादी योद्धा को पूर्व नेता प्रतिपक्ष उत्तर प्रदेश रामगोविंद चौधरी ने सादर नमन किया है।जननायक और वैचारिक प्रखरता का प्रतीकचंद्रशेखर जी केवल राजनेता नहीं, बल्कि सच्चे जननायक थे। बलिया की मिट्टी से निकलकर देश के प्रधानमंत्री बने उनका सफर कड़ी मेहनत और जनसेवा का जीवंत प्रमाण है। 1983 की ऐतिहासिक ‘कन्याकुमारी से दिल्ली पदयात्रा’ ने उन्हें जनमानस से जोड़ा। इस यात्रा का मकसद कुपोषण, पेयजल संकट और सामाजिक असमानता जैसी बुनियादी समस्याओं को उजागर करना था।निर्भीक वक्ता और संसदीय शेरसंसद में उनकी बेबाक आवाज पक्ष-विपक्ष दोनों को मंत्रमुग्ध कर देती थी। निर्भीक टिप्पणियों और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के लिए वे विख्यात रहे।सादगी व शुचिता का जीवन दर्शनसत्ता के शिखर पर रहते हुए भी उनकी ग्रामीण सादगी बरकरार रही। “राजनीति मेरे लिए पेशा नहीं, राष्ट्र सेवा का माध्यम है”—यह उनका जीवन-दर्शन था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।रामगोविंद चौधरी ने कहा, “आज उनकी जयंती पर हम सत्य, साहस और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। उनके आशीर्वाद से मार्गदर्शन मिलता रहे। शत-शत नमन!”जय चंद्रशेखर! जय बलिया! जय भारत!(रामगोविंद चौधरी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष, उत्तर प्रदेश
























