बदायूं : मुरादाबाद – फर्रुखाबाद हाइवे का हजारा मोड बना एक्सीडेंटल जोन जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान आए दिन हो रहे हादसे

बदायूं : मुरादाबाद – फर्रुखाबाद हाइवे का हजारा मोड बना एक्सीडेंटल जोन जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान आए दिन हो रहे हादसे

बदायूं : जनपद से गुजरने वाले मुरादाबाद – फर्रुखाबाद हाइवे पर जनपद बदायूं में स्थित हजारा मोड धीरे धीरे एक्सीडेंटल जोन बनता जा रहा है आए दिन इस मोड पर कोई न कोई हादसा हो रहा है लेकिन जिम्मेदार लोग इस ओर से पूरी तरह आंखे मूंद कर हाथ पर हाथ रखकर बैठे एक के बाद एक हादसे की गिनती कर रहे है इस ओर न कोई प्रशासनिक अधिकारी और न कोई जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहा है। आए दिन भीषण हादसों के कारण यह मोड़ लोगो में खौफ का पर्याय बन चुका है लोग यहां से गुजरते समय अपने इष्ट देवताओं से अपनी जान की सलामती की दुआ करते देखे जा सकते है बीती रात भी इसी मोड पर दो ट्रकों की आमने सामने हुई भिड़ंत ने मार्ग दुर्घटनाओं की लिस्ट में एक और भीषण हादसा दर्ज करने का काम किया है। हां इतना जरूर है कि हादसे के बाद स्थानीय पुलिस पहुंचकर वाहनों को एक साइड मे लगवाकर घायलों को उपचार और मृतकों को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर अपने कर्तव्यों का पालन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करती देखी जा सकती है।

हजारा मार्ग पर होने वाली दुर्घटनाओं के क्रम में कल रात एक अध्याय उस समय और जुड़ गया जब पास देर रात दो ट्रकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। इस हादसे में दोनों ट्रकों के चालक घायल हो गए, जिनमें से एक को गंभीर चोटें आई हैं। घटना रात करीब 2 बजे के बाद की है। पुलिस के अनुसार, ट्रक संख्या यूपी 21 बी एन1170 और कंटेनर संख्या एच आर 56 ए डब्ल्यू 6853 के बीच यह भिड़ंत उसावां-म्याऊं रोड पर हजारा मोड़ से लगभग 200 मीटर आगे म्याऊं की दिशा में हुई। ट्रक के चालक हरविंदर पुत्र महेंद्रपाल, निवासी सिद्धपुर अधोली, थाना बिसौली, जनपद बदायूं को साधारण चोटें आईं। वहीं, कंटेनर के चालक अभिषेक को गंभीर चोटें लगीं। उसावां पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस की मदद से दोनों घायल चालकों को जिला अस्पताल बदायूं में भर्ती कराया।

हादसे के बाद मौके पर यातायात व्यवस्था सामान्य कर दी गई है और शांति व्यवस्था कायम है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अब सवाल यह उठता है कि जब एक के बाद एक लगातार हादसे हो रहे है तो प्रशासन द्वारा उक्त जगह पर गति अवरोधक मार्ग सूचक तथा अन्य दुर्घटना संभावित क्षेत्रों दी जाने वाली सुविधाओं को लागू क्यों नहीं कर रहा है और इस समस्या को देखने के बाद भी स्थानीय जनप्रतिनिधि इस विषय पर कुछ बोलने को तैयार क्यों नहीं है?

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